कलकता,
हिसार जिले के आदमपुर निवासी एवं पश्चिमी बंगाल के एसटीएफ प्रमुख मुरलीधर शर्मा ‘तालिब’ द्वारा लिखित गज़़ल संग्रह हासिल-ए-सहरा नवर्दी का विमोचन पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया। इस पुस्तक में कुल 105 गज़़ल है।
पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुरलीधर शर्मा ‘तालिब’ एक बेहतरीन पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ उम्दा शायर भी है। उनकी इस काबलियत पर उन्हें गर्व है। पुलिस की नौकरी काफी कठिन और तनावपूर्ण होती है। ऐसे में मुरलीधर शर्मा ‘तालिब’ द्वारा कलम और जुबान द्वारा गज़़ल का हुनर बिखेरना उनकी प्रतिभा को जाहिर करता है। इस दौरान उन्होंने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे उम्मीद करती है कि मुरलीधर शर्मा ‘तालिब’ की दूसरी किताब भी जल्द ही पढऩे को मिलेगी।
बचपन से रहे है कलाकार
हरियाणा के हिसार जिला के आदमपुर निवासी आईपीएस मुरलीधर शर्मा ‘तालिब’ बचपन से ही कलाकार रहे हैं। उन्होंने आदमपुर की श्री लक्ष्मी कला मंडल में राम की भूमिका कई साल तक निभाई। भजन गाने के शौक के चलते वे अक्सर सत्संग में भजन गाते थे। आदमपुर कॉलेज में उनकी कई गज़़लें काफी प्रसिद्ध रही है। स्कूली दिनों से ही उनको लिखने का शौक रहा है। उन दिनों में कई अखबारों में उनकी लघु कथाएं व कविताएं छपती रहती थी।
आईपीएस बनने के बाद सीखी उर्दू
आदमपुर की मूल भाषा बिश्नोई टच की बागड़ी रही है। सरकारी स्कूल और कॉलेज में पढऩे के बावजूद उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी भाषा पर अच्छी पकड़ बनाई। गज़़ल गाने के शौक के कारण उर्दू सीखने की ललक बचपन से रही, लेकिन यह ललक कलकता में डीसीपी पद पर नियुक्ति के बाद पूरी हो पाई। अपनी मेहनत और लग्न के चलते उन्होंने उर्दू जुबान में महारत हांसिल कर ली।
आम जिंदगी से जुड़ी रचानाएं
‘हासिल—ए—सहरा नवर्दी’ में संकलित गज़़लें आमजन की जिंदगी से जुड़ी है। इन्हें पढऩे से पाठकों को अहसास होता है कि ये गज़़ल उनके जीवन के आसपास ही है। ‘हासिल-ए-सहरा नवर्दी’ में संकलित 105 गज़़ल हर इंसान को अपनी जिंदगी का आईना प्रतीत होता है।
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