हिसार

सरकार ने संवादहीनता छोड़कर बात नहीं की तो होगा कड़ा : यूनियन

हिसार,
हरियाणा संयुक्त कर्मचारी मंच एवं आंगनवाड़ी इंपलाइज फैडरेशन ऑफ इंडिया से संबंधित आंगनवाड़ी वर्कर एंड हेल्पर्स यूनियन सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उसने संवादहीनता छोड़कर आंगनवाड़ी महिलाओं से बातचीत नहीं की तो भविष्य में और कड़ा संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के 13 दिन होने के बाद भी सरकार ने बातचीत की जरूरत नहीं समझी है जो सरकार के घमंड व गैर जिम्मेदाराना व्यवहार का प्रतीक है।

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यूनियन की राज्य महासचिव जगमति मलिक एवं जिला प्रधान बिमला राठी ने लघु सचिवालय के समक्ष अनिश्ििचतकालीन धरने पर बैठी आंगनवाड़ी महिलाओं को संबोधित करते हुए उनसे एकजुट रहने व अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में डटे रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर वर्ग को परेशान करना मौजूदा सरकार ने नियम बना लिया है। पिछले 12-13 दिनों से आंगनवाड़ी महिलाएं आंदोलनरत है और कामकाज ठप है लेकिन सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है, जिससे सिद्ध होता है कि सरकार को नौनिहालों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस भी सरकार ने आंगनवाड़ी महिलाओं को दबाने का प्रयास किया है, उसका हश्र बुरा हुआ है और मौजूदा सरकार भी पूर्व सरकारों के कदमों पर चल रही है।

जिला प्रधान बिमला राठी ने कहा कि आंगनवाड़ी वर्करों व हेल्परों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, अन्य कर्मचारियों की तरह 6 से 8 घंटे की ड्यूटी को देखते हुए योग्यता व ड्यूटी टाइम के हिसाब से उन्हें जेबीटी अध्यापक का ग्रेड देने, जिस तरह अन्य विभागों में 25 प्रतिशत प्रमोशन का कोटा है, उसी तरह उनको भी वरिष्ठता व योग्यता के अनुसार सीधे सुपरवाइज की पदोन्नति देने, मोबाइल फोन की सुविधा देने, वर्कर को 18 हजार व हेल्पर को 15 हजार न्यूनतम वेतन देने, हेल्पर के छुट्टी पर जाने या रिक्त स्थान होने पर अतिरिक्त हेल्पर का प्रावधान करने, हेल्पर से वर्कर पदोन्नत करने के लिए कार्य अनुभव 10 वर्ष से कम करके 3 वर्ष करने, वर्कर का खाली पद सीधा हेल्पर से भरने, खाना बनाने के लिए सिलेंडर की सप्लाई विभाग सीधे रूप से करने सहित अन्य मांगों पर आंगनवाड़ी महिलाओं का आंदोलन जारी है और यह तब तक जारी रहेगा, जब तक इन मांगों व समस्याओं का समाधान नहीं कर दिया जाता।
धरने के दौरान राज्य महासचिव जगमति मलिक व जिला प्रधान बिमला राठी के अलावा सरोज, सुदेश, नरेश, विद्या, कांता, कौशल्या, भागवंती, अमरपति, गीता, नीलम, संतोष, राजवंती, गायत्री, राजबाला, मूर्ति, सरला, ऊषा सहित सैंकड़ों महिलाएं उपस्थित थी। सभी ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और अपना आक्रोष जाहिर किया।

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