हिसार

ट्रेड यूनियनों व कर्मचा​री संंगठनोें के आह्वान पर जोरदार प्रदर्शन करके गरजे संगठन

हिसार,
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी फेडरेशनों के सयुक्त राष्ट्रव्यापी आह्वान पर यहां के क्रांतिमान पार्क में सीटू, इंटक, एटक, सकसं एटक, ह​रियाणा कर्मचारी महासंघ व किसान सभा ने सरकार की मजदूर,किसान व कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेर्शन की अध्यक्षता सीटू जिला प्रधान कामरेड सुरेश कुमार, सकसं के सुरेंद्र मान, एटक के का. रूपसिंह, महासंघ के नेता सत्यवान, इंटक के कृष्ण नैन, एआईयूटीयूसी के नेता मेहर सिंह बांगड, कर्मचारी नेता एमएल सहगल, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान सुरेंद्र ने की जबकि संचालन अशोक सैनी व इंटक नेता राजेश गोरछी ने किया।
कार्यक्रम में मस्लिम कल्याण कमेटी हिसार के होशियार खान इटक के प्रदीप सिंह, महासंघ के नेता राजपाल नैन, सर्व कर्मचारी संघ के नेता नरेश गौतम, सीटू नेता विरेन्द्र दुर्जनपुर, मनोज सोनी, दलबीर किरमारा, किसान नेता प्रदीप सिंह व प्रेम सिंह आदि ने भी सम्बोधित किया।
वक्ताओं ने अपने सम्बोधन में कहा कि यह दूसरा अवसर पर है जब देश के केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, सरकारी कर्मचारियों की फेडरेशन के देशव्यापी आह्वान के तहत आज अपनी प्रतिरोध कार्यवाही कर रहे हैं। इससे पूर्व 22 मई को भी इस प्रकार की कार्यवाही करते हुए सरकार को ज्ञापन दिया जा चुका है। केन्द्र व अधिकांश राज्य सरकारों ने इस महामारी को मजदूरों-कर्मचारियों व आमजन के अधिकारों पर हमले के अवसर के रूप में ही लिया है। बीते तीन महीने का अर्सा दिखाता है कि सरकार इस बीमारी से बचाने के लिए कम गंभीर नजर आई है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र को बेचने, श्रमिक के पक्ष में बने कानूनों व अधिकारां को निरस्त करने, संविधान की रक्षा एवं न्यायपरस्त लोगों को जेल में डालने आदि में ज्यादा व्यस्त रही है। प्रवासी मजदूरों, गरीब लोगों व जिन परिवारों का रोजगार खत्म हो गया है उन्हें न के बराबर मदद मिली है। उद्योगों में वेतन न देना, वेतन कटौती, नौकरी छीनना बड़े पैमाने पर जारी है और सरकारी मशीनरी मौन है।
विश्व बाजार में तेल की कीमतों में घटौतरी के बावजूद पैट्रोल-डीजल के भावों में भारी बढ़ौतरी सरकार की अमानवीय चेहरे को ही दिखाता है। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से अमल नहीं किया गया तो भविष्य में हड़ताल व असहयोग आन्दोलन करने से नहीं गुरेज नहीं करेंगे। बाद में प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा गया जिसमें विभिन्न संगठनों व वर्गों से जुड़ी अनेक मांगे रखी गई।

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