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दूसरों के लाडलों को बचाते खुद भी झुलस गए थे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनिल राव

डबवाली अग्निकांड के पीडि़तों को श्रद्धांजलि के लिए रक्तदान शिविर 27 को

बेटी की याद में मासूमों की खातिर हर बरस भेजते हैं पीडि़तों के घर फूल

हिसार, (राजेश्वर बैनीवाल)।
हरियाणा सरकार के आज भी एक ऐसे अधिकारी हैं जो बेशक अपनी ड्यूटी के मामले में सख्त हो लेकिन एक बाप होने के नाते उनके सीने में भी एक संवेदनशील दिल धडक़ता है। यही कारण है कि 25 साल पुरानी घटना की यादें आज भी उनको झकझोर कर रख देती हैं। उनकी आंखों के आगे घटित उस घटना में उन्होंने अपनी बेटी सुरभि को खो दिया। वर्ष 1995 में 23 दिसम्बर को डबवाली के एक स्कूल में आग ने इस कदर तांडव मचाया था कि उसने अपनी आगोश में कई मासूम बच्चों को ले लिया। इसी हादसे में उक्त अधिकारी अनिल राव की बेटी सुरभि भी आग की लपटों में खो गई। अनिल राव ने कई जानों को नया जीवन दिया और खुद भी झुलस गए थे। अब इन बच्चों की स्मृति में पीडि़तों को हौसला देने के इरादे से वे इस हादसे की हर बरसी पर पीडि़तों के घरों में फूल भेजते हैं। फिलहाल अनिल राव (पूर्व आईपीएस) हरियाणा सरकार में सार्वजनिक सुरक्षा, परिवाद व सुशासन सलाहकार और सीएम विंडो के समग्र प्रभारी हैं।
अनिल राव की बेटी सुरभि की याद में हिसार के कुछ समाजसेवियों ने मिलकर सुरभि मानव कल्याण समिति बनाई हुई है जो समाजसेवा के कार्य करती है। डबवाली अग्निकांड के पीडि़तों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य ये समिति 27 दिसम्बर रविवार को पटेल नगर में एक रक्तदान शिविर का आयोजन कर रही है। समिति के सचिव ने बताया कि ये रक्तदान शिविर पटेल नगर के सामुदायिक केन्द्र में आयोजित किया जायेगा। पिछले साल भी समिति की तरफ से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। इसके अलावा उनकी समिति ने लॉकडाउन के दौरान भी सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों को राशन पहुंचाने का काम किया था।

अचानक हो गया हादसा
23 दिसम्बर 1995 को डबवाली के एक निजी स्कूल में सालाना समारोह था। उस वक्त डबवाली में तैनात तत्कालीन डीएसपी अनिल राव इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। खास बात ये भी थी कि इस समारोह में उनकी लाडली सुरभि भी हिस्सा ले रही थी और वे अपनी इस 5 साल की बेटी की प्रस्तुति को देखने व उसका हौसला बढ़ाने के लिए भी पहुंचे हुए थे। सब कुछ सही चल रहा था कि एकाएक हर तरफ चीत्कार मच गया। आग की लपटों ने तांडव मचाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते आग के बवंडरों ने हर उसको अपनी जद में ले लिया जो इसकी चपेट में आए, सुरभि भी उन सैकड़ों बच्चों में एक थी। अनिल राव ने जब यह मंजर देखा तो वे भूल गए कि उनकी बेटी भी जल रही है लेकिन उन्होंने हर उस बच्चे को बचाने की कोशिश की जो उन्हें नजर आया। ऐसा करते हुए वे खुद भी झुलस गए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उस वक्त अनिल राव को महज डबवाली में चार्ज लिए चार दिन ही हुए थे।
इसलिए भेजते हैं फूल
गुरुग्राम के रहने वाले पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अनिल राव 25 साल पहले अग्निकांड में जख्म हासिल करने वालों के पास फूल भेजते हैं। इसके पीछे का मकसद है कि प्रभावित परिवार और नाजुक बच्चे खुद को अकेला न समझे। जैसे फूल तूफान को सहता है और अपनी महक से समाज को खुशबू से भर देता है। वैसे ही राव की सोच है कि पीडि़त बच्चे फूल के सामान जल्दी उठे और स्वस्थ होकर समाज को खुद के मुस्कान से गुलजार कर दें। उनका यह प्रयास न केवल इस अग्रिकांड के पीडि़तों को हिम्मत बंधाता है अपितु दूसरों को भी प्रेरणा देता है कि आंखों से आंसू पौंछना ही सबसे बड़ा धर्म है।
बता दें कि इससे पूर्व अनिल राव सीआईडी हरियाणा के एडीजीपी, आईजीपी, आईजी व एसपी रहते हुए बहुत से यादगार कार्य कर चुके हैं। इन्होंने अपने कार्याकाल में सतलोक आश्रम रामपाल प्रकरण, जाट आरक्षण, संत राम रहीम आदि के अति संवदेनशीलल मामलों को संभालने में अहम योगदान दिया है। अनिल राव ने अपने कार्यकाल में पुलिस विभाग का आधुनिकरण किया, जिससे अपराधियों से निपटने के में आसानी हुई। उनके कार्यों के लिए राष्ट्रपति अवार्ड, प्रधानमत्री मेडल, पुलिस मेडल, असाधारण आसूचना कुशलता पदक सहित बहुत से सम्मानों से नवाजा जा चुका है। कोरोना महामारी के समय में भी अनिल राव को लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को हरियाणा से यूपी व बिहार सहित देश के बहुत से राज्यों में भेजने व अन्य जगहों पर फंसे हरियाणा के श्रमिकों को वापिस प्रदेश लाने के कार्य का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था।

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