धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से- 211

आमतौर पर आज के युग में ऐसा देखा जाता है कि लोग सही फैसला लेने से पहले कई बार सोचते हैं कि कहीं कोई उनके किसी फैसले की वजह से कोई नाराज तो नहीं हो जाएगा लेकिन महाभारत में श्रीकृष्ण ने सही फैसला लेने के लिए किसी भी व्यक्ति की परवाह नहीं की और उन्होंने वही किया, जो न्याय के लिए उन्हें जरूरी लगा।

जब श्रीकृष्ण ने देखा कि युद्ध अनिवार्य बन गया है और कौरव अपनी हरकतों से बाज नहीं आएंगे, तो उन्हें बदलाव के लिए युद्ध जरूरी लगा और उन्होंने किसी की नाराजगी की परवाह न करते हुए युद्ध का रास्ता पांडवों को सुझाया। अपने फैसले पर अटल रहने के लिए उन्हें गांधारी का शाप तक मिल गया लेकिन उन्होंने इस बात की परवाह नहीं की।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, सही फैसला करने में कभी भी किसी की खुशामंद या नराजगी को नहीं देखना चाहिए। यदि ऐसा करते हुए परिवार के सदस्य या मित्र नाराज होते है तो इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। जो धर्मसंगत हो वही काम करना करना चाहिए।

Related posts

स्वामी राजदास : स्त्री और नमक

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 591

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के प्रवचनों से—248