धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—323

एक सेवक महल के बाग से अपने राजा के लिए रोज अलग-अलग फल लेकर जाता था। एक दिन राजा के बाग में नारियल, अमरूद और अंगूर एक साथ पक गए। सेवक ने सोच रहा था कि आज राजा के लिए कौन सा फल लेकर जाए।

बहुत सोचने के बाद सेवक ने अंगूर तोड़कर टोकरी में रख लिए। अंगूर की टोकरी लेकर वह राजा के पास पहुंच गया। राजा अपने राज्य की समस्याओं की वजह से चिंतित थे और कुछ सोच रहे थे। सेवक ने टोकरी राजा के सामने रख दी और खुद थोड़ी दूर बैठ गया।

चिंतित राजा गहरी सोच में था। वह टोकरी में से एक-एक अंगूर उठाता, कुछ खाता और कुछ सेवक के ऊपर फेंक रहा था। जब-जब राजा सेवक के ऊपर अंगूर फेंकता, सेवक हर बार कहता कि भगवान तू बड़ा दयालु है। कुछ देर बाद राजा ने ये बात सुनी कि सेवक बोल रहा है भगवान तू बड़ा दयालु है। ये सुनते ही राजा का ध्यान टूटा और उसने सेवक से पूछा कि मैं तुम्हारे ऊपर बार-बार अंगूर फेंक रहा हूं और तुम क्रोधित न होकर भगवान को दयालु क्यों कह रहे हो?

सेवक ने राजा से कहा कि महाराज आज बाग में नारियल, अमरूद और अंगूर तीन तरह के पके थे। मैं सोच रहा था कि आपके लिए आज क्या लेकर जाऊं? तभी मुझे लगा कि आज अंगूर लेकर जाना चाहिए। अगर मैं नारियल या अमरूद लेकर आता तो मेरा हाल और बुरा हो जाता। इसीलिए में भगवान को दयालु कह रहा हूं। उस समय मेरी बुद्धि ऐसी कर दी कि मैं अंगूर ले आया। इसीलिए कहते हैं जो होता है, अच्छे के लिए होता है। समय पक्ष का हो या विपक्ष का, हमें हर स्थिति में भगवान का आभार मानना चाहिए।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, समय कैसा भी हो, हमें स्थिति में भगवान का आभार मानना चाहिए। हर स्थिति में हमारी सोच सकारात्मक ही होनी चाहिए, नकारात्मकता से बचना चाहिए। भगवान अपने भक्तों की भलाई ही करते हैं।

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