धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 348

एक चिड़िया जंगल में एक पेड़ पर रहती थी। जंगल बिलकुल सूखा हुआ था। न घास, न पेड़, न फूल, न फल। जिस वृक्ष पर चिड़िया रहती थी उस पर भी सिर्फ सूखी टहनियाँ थीं। पत्ते भी नहीं थे। चिड़िया वहीं रह कर हर समय शंकर भगवान का जाप और गुणगान करती रहती थी।

एक बार नारद जी जंगल में हो कर जा रहे थे। चिड़िया ने देख लिया। तुरंत आकर बोली नारद जी आप कहाँ जा रहे है। नारद ने कहा शंकरजी के पास जा रहा हूँ। चिड़िया ने कहा भगवान शंकर मेरा बड़ा ध्यान रखते है। मेरे सूखे जंगल के बारे में उन्हें पता नहीं है शायद। कृपया उनसे कह दीजिएगा मेरे जंगल को हरा भरा कर दें।

नारद जी शंकर जी के पास जाकर चिड़िया के जंगल की बात की, नारद के कई बार कहने पर शंकर जी ने कहा मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता हूँ नारद। चिड़िया के भाग्य में सात जन्म, ऐसे ही सूखे जंगल में रहना लिखा है। नारद कुछ नहीं बोले।

कुछ समय बाद नारद जी फिर वहाँ से निकले तो देखा जंगल बिल्कुल बदला हुआ था। जंगल हरा भरा, हरी घास, फूल, फल लदे हुये थे। चिड़िया का पेड़ फूलों और फलों से लदा था। चिड़िया भी प्रेममग्न होकर पेड़ पर नाच रही थी। नारद जी ने सोचा शंकर जी ने मुझ से झूठ बोला।

नारद जी ने शंकर जी से जंगल के हरे भरे तथा चिड़िया के बारे में पूछा तो शंकरजी ने कहा कि मैनें चिड़िया को कभी कुछ नहीं दिया, फिर भी मेरा गुणगान करती रहती है। उसकी भक्ति, विश्वास और प्रेम की वजह से मुझे सातों जन्म काट कर सब चिड़िया को देना पड़ा। प्रेम, भक्ति और विश्वास के आगे भगवान भी विवश हो जाते हैं।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, भक्ति में शक्ति होती है। अगर आप अपने आराध्य के प्रति समर्पित हैं तो आपका कोई काम नहीं रुक सकता है। यहां तक कि भाग्य में खराब लिखा है तो वह भी अच्छा हो जाएगा।

Related posts

परमहस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—352

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—114

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—331