धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—455

एक जंगल में हाथियों के समूह के साथ उनका मुखिया चतुरदंत रहता था। एक बार उस जंगल में कई वर्षों तक पानी नहीं बरसा। अकाल की स्थिति निर्मित हो गई। चतुरदंत ने कुछ हाथियों को पानी की खोज में जंगल से बाहर भेजा। उन्होंने आकर एक सरोवर के विषय में बताया। सभी हाथी अगले दिन वहां पहुंचे और जीभरकर पानी पिया, स्नान किया और दिनभर जलक्रीड़ा की।

उस सरोवर के चारों ओर फैली घास पर खरगोश रहते थे। हाथियों के इधर-उधर आने-जाने से उनके पैरों के नीचे कई खरगोश दबकर मर गए। हाथियों के जाने के बाद खरगोशों ने विचार किया कि यदि हाथी रोजाना यहां आएंगे तो हममें से कोई भी नहीं बचेगा। एक बुजुर्ग खरगोश ने सुझाव दिया कि हमारा एक साथी चंद्रमा का दूत बनकर हाथियों के राजा के पास जाकर भगवान्‌ चंद्रमा का संदेश दे कि इस सरोवर के चारों ओर उसके परिजनों का निवास है, जिनके हाथियों के पैरों तले कुचले जाने की आशंका से उन्हें इसके पास न आने की आज्ञा दी जाती है।

अगर हाथियों ने भगवान चंद्रमा की बात नहीं मानी तो उनके क्रोध से हाथियों का विनाश हो जाएगा। लंबकर्ण नामक एक बुद्धिमान खरगोश ने चतुरदंत को यह संदेश दिया और प्रमाणस्वरूप तेजी से बहते सरोवर के जल में हिलते चंद्रमा को दिखाकर कहा- गौर से देखो। भगवान चंद्रमा क्रोध से कांप रहे हैं? चतुरदंत ने भयभीत होकर हाथियों को उस सरोवर की ओर न जाने का आदेश दिया और नया जलस्रोत खोजने को कहा।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, बाहुबल न होने पर बुद्धिबल से काम लेने से सफलता प्राप्त होती है।

Shine wih us aloevera gel

https://shinewithus.in/index.php/product/anti-acne-cream/

Related posts

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—718

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—352

Jeewan Aadhar Editor Desk

स्वामी राजदास : साधना