धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 854

एक बार एक साधु अपने शिष्य के साथ जंगल से गुजर रहे थे। रास्ते में उन्हें एक व्यक्ति मिला, जो बहुत मीठी बातें कर रहा था और खुद को बहुत ज्ञानी बता रहा था। उसने शिष्य से कहा, “मैं तुम्हें ऐसा ज्ञान दूँगा जिससे तुम तुरंत सफल हो जाओगे, बस मेरी बात मानो।”

शिष्य उसकी बातों में आ गया और उसने गुरु से बिना पूछे उस व्यक्ति का साथ पकड़ लिया। वह व्यक्ति शिष्य को एक शॉर्टकट रास्ते से ले गया, लेकिन थोड़ी ही दूर जाने पर वह रास्ता दलदल में बदल गया। शिष्य फँस गया और घबराने लगा।

उधर साधु धीरे-धीरे चलते हुए वहाँ पहुँचे और शिष्य को बाहर निकाला। शिष्य बहुत शर्मिंदा हुआ और बोला, “गुरुदेव, मैंने उसकी मीठी बातों में आकर गलती कर दी।”

साधु मुस्कुराए और बोले, “बेटा, जीवन में हर मीठी बात करने वाला व्यक्ति सच्चा नहीं होता। गलत लोगों और गलत बातों से सतर्क रहना जरूरी है। हमारी एक छोटी सी लापरवाही, हमारे बने-बनाए काम को भी बिगाड़ सकती है।”

शिष्य ने सिर झुका लिया और उस दिन से उसने यह सीख अपने जीवन में उतार ली कि
सावधानी ही सफलता की रक्षा करती है, और विवेक ही सही रास्ता दिखाता है।

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