धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 868

एक छोटे से गांव में दो भाइयों दोनों के बीच गहरा प्रेम था। बड़ा भाई शादीशुदा था और उसका एक छोटा भाई अविवाहित था। दोनों साथ मिलकर खेती करते थे।

एक दिन उनकी फसल पककर तैयार हो गई। दोनों भाइयों ने पूरे दिन मेहनत की और फसल काटी। जब तक काम पूरा हुआ, तब तक रात हो चुकी थी। दोनों ने अपनी-अपनी फसल के ढेर अलग-अलग बना लिए थे, लेकिन रात के अंधेरे में उन दोनों के ढेरों को घर ले जाना संभव नहीं था। इसलिए दोनों भाइयों ने फैसला किया कि वे रात में खेत पर ही रुककर फसल की रखवाली करेंगे और सुबह मजदूर बुलाकर फसल को घर ले जाएंगे।

रात गहराने लगी और कुछ समय बाद दोनों भाइयों को भूख लगने लगी। उन्होंने तय किया कि एक-एक करके घर जाकर खाना खाकर वापस आ जाएंगे। पहले बड़ा भाई घर चला गया और छोटा भाई खेत पर ही रखवाली कर रहा था।

अकेले बैठकर छोटे भाई के मन में विचार आया- “मेरे बड़े भाई के पास परिवार है, पत्नी है, बेटा है। उसकी जिम्मेदारियां मुझसे ज्यादा हैं। मुझे तो अकेले ही रहना है, इसलिए मुझे कम अनाज की जरूरत है।” यह सोचकर उसने अपने ढेर में से थोड़ा अनाज उठाकर बड़े भाई के ढेर में डाल दिया।

कुछ देर बाद बड़ा भाई वापस लौटा और छोटे भाई को खाने के लिए घर भेज दिया। जब छोटा भाई चला गया, तो बड़े भाई के मन में विचार आया- “मेरा तो परिवार है जो मेरा ध्यान रखता है, लेकिन मेरा छोटा भाई अकेला है। उसका भविष्य सुरक्षित होना चाहिए। उसे ज्यादा अनाज की जरूरत है।” यह सोचकर उसने भी अपने ढेर से थोड़ा अनाज उठाकर छोटे भाई के ढेर में डाल दिया।

सुबह जब दोनों ने देखा, तो उनके ढेर बराबर ही थे। दोनों को यह समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हुआ, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें एक-दूसरे के प्रेम और त्याग का एहसास हुआ। उस दिन उनके बीच का रिश्ता और भी गहरा हो गया।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, आज हर व्यक्ति अपने बारे में ज्यादा सोचता है, लेकिन जो लोग दूसरों के सुख-दुख को समझते हैं, उनके आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं। जब आप दूसरों के लिए सोचते हैं, तो बदले में आपको सम्मान और प्रेम मिलता है।

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