हिसार,
देशभर में होने वाली एक चौथाई मौतों के लिए हृदय रोग जिम्मेदार है। धूम्रपान, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा व वायु प्रदूषण आदि कारणों से होने वाली यह बीमारी देश में फैल रही किसी महामारी से कम नहीं है। यह स्थिति चिंता का विषय है। कम उम्र के लोगों में भी हृदय रोग देखा जा रहा है।
यह बात सपरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डा. दिनेश सहगल ने विश्व हृदय दिवस 29 सितम्बर से पूर्व हृदय रोगों के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए आयोजित पत्रकार वार्ता में कही। इस मौके पर सपरा मल्टी स्पेशलिटी के हर्ट सर्जन डा. जयभगवान ढुल भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि देश में महामारी व अन्य संक्रामक रोगों में कमी आ रही है जबकि गैर संक्रामक बीमारियां पैर पसार रही हैं। कोरोना महामारी ने भी सबसे अधिक हृदय रोगियों को गंभीर रूप से बीमार किया और सबसे अधिक जानें भी हृदय रोग से पीडि़त कोरोना संक्रमितों की हुई। इसलिए कहा जा सकता है कि हृदय रोग से पीडि़त लोगों के लिए कोरोना काफी हृदय विदारक रहा। डा. सहगल के अनुसार हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि भारतीयों में हृदय रोगों के लिए नौ प्रमुख जोखिम कारक पाए गए हैं, जिनमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, डिस्लिपिडेमिया, धूम्रपान, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, कम मात्रा में फल और सब्जियों का सेवन, अधिक वसा युक्त भोजन और मनोसामाजिक तनाव शामिल हैं। इन सब कारणों में सबसे अधिक मधुमेह से पीडि़त लोगों में हृदय रोग के विकसित होने और मृत्यु की आंशका होती है, ये अन्य कारकों से दोगुनी होती है।
डा. दिनेश सहगल ने बताया कि आज देश में 18 वर्ष से अधिक उम्र का हर चौथा व्यक्ति उच्च रक्तचाप की चपेट में है। इसी तरह बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मौत का मुख्य कारण बनता है। भोजन में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढऩे से धमनियां सकरी हो सकती हैं और रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। दस में से एक हृदय रोगी की मौत धूम्रपान संबंधी कारणों से होती है। धूम्रपान या तंबाकू चबाना रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि हृदय रोग पूरे विश्व में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के बारे में विस्तार से बात करें तो इसमें सबसे सामान्य हृदय रोग कोरोनरी हर्ट डिजीज़ है। इसमें दिल को खून पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनी सिकुड़ जाती है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और वह हर्ट अटैक का कारण बनता है।
इस मौके पर सपरा मल्टी स्पेशलिटी के हर्ट सर्जन डा. जयभगवान ढुल ने बताया कि सब कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से बचने के लिए व्यक्तिगत, सरकारी हितधारकों को व नीति निर्माताओं को मिलकर काम करना होगा। व्यक्तिगत तौर पर स्वस्थ्य जीवनशैली अपनाकर सीवीडी से बचा जा सकता है, जिसमें स्वस्थ खानपान, शारीरिक श्रम, धुम्रपान व तंबाकू सेवन से बचना व शराब का हानिकारक प्रयोग छोडऩा शामिल है।