धर्म

सत्यार्थप्रकाश के अंश—25

सेनापति और बलाध्यक्ष अर्थात् आज्ञा का देने और सेना के साथ लडऩे लड़ाने वाले वीरों को आठों दिशाओं में रखे, जिस ओर से लड़ाई होती हो उसी ओर से सब सेना का मुख रखे परन्तु दूसरी ओर भी पक्का प्रबन्ध रखे नहीं तो पीछे से शत्रु की घात होने का सम्भव होता है।
जो गुल्म अर्थात् दृढ़ स्तम्भों के तुल्य युद्धविद्या से सुशिक्षित धार्मिक स्थित होने और युद्ध करने में चतुर भयरहित और जिनके मन में किसी प्रकार का विकार न हो उन को चारों और सेना के रखे। नौकरी की तलाश है..तो यहां क्लिक करे।
जो थोड़े पुरूषों से बहुतों के साथ युद्ध करना हो तो मिलकर लड़ावे और काम पड़े तो उन्हीं को झट फैला देवे। जब नगर दुर्ग वा शत्रु की सेना में प्रविष्ट होकर युद्ध करना हो तो सब सूचीव्यहू अथवा वज्रव्यूह जैसे दुधारू खड्ग ,दोनों और युद्ध करते जाये और प्रविष्ट भी होते चलें वैसे अनेक प्रकार के व्यूह छूट रही हो तो सर्वव्यूह अर्थात् सर्प के समान सोते सोते चले जायें,जब तोपों के पास पहुंचे तब उनको मार वा पकड़ तोपों का मुख शत्रु की ओर फेर उन्हीं तोपों से वा बन्दुक आदि से उन शत्रुओं को मारे अथवा वृद्ध पुरूषों को तोपों के मुख के सामने घोड़ो पर सवार करा दौड़ावे और मारें, बीच अच्छे-अच्छे सवार रहैं,एक बार धावा कर शत्रु की सेना को छिन्न-भिन्न कर पकड़ लें अथवा भगा दें।
जो समभुमि में युद्ध करना हो तो रथ घोड़े और पदातियों से और जो समुद्र में युद्ध करना हो तो नौका और थोड़े जल में हाथियों पर,वृक्ष और झाड़ी में बाण तथा स्थल बालू में तलवार और ढाल से युद्ध करे करावें। जीवन आधार प्रतियोगिता में भाग ले और जीते नकद उपहार

जिस समय युद्ध होता हो उस समय लडऩे वालों को उत्साहित और हर्षित करें। जब युद्ध हो जाय तब जिस से शौर्य और युद्ध में उत्साह हो वैसे वक्तृत्वों से सब चित को खान-पान,अस्त्र-शास्त्र सहाय और औषधादि से प्रसन्न रखे। व्यूह के विना लड़ाई न करे, न करावे, लड़ती हुई अपनी सेना की चेष्टा को देखा करे कि ठीक-ठीक लड़ती है वा कपट रखती है। जीवन आधार न्यूज पोर्टल के पत्रकार बनो और आकर्षक वेतन व अन्य सुविधा के हकदार बनो..ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करे।
किसी समय उचित समझे तो शत्रु को चारों ओर से घेर कर रोक रखे, और इसके राज्य को पीडि़त कर शत्रु के चारा,अन्न,जल,इन्धन को नष्ट व दूषित कर दे।
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