धर्म

ओशो : मन और मंत्र

नौकरी की तलाश है..तो यहां क्लिक करे।

जीवन आधार न्यूज पोर्टल में पत्रकार बने .. आकर्षक वेतन व अन्य सुविधाएं ले..ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करे।


मंत्र उसी शब्द से बनता है,जिससे मन बनता है। मन और मंत्र एक ही धातु से बनते हैं। मन मंत्र की विधि है। और अगर तुम राम-राम न जपोगे तो तुम कुछ और जपोगे। खयाल रखना। जपने से बच नहीं सकते। फिओशो का सोवै दिन फिल्मी गाना दोहराओगे। कोई आदमी स्नान करता है बाथरूम में और राम-राम-राम-राम जपता है,और तुम कोई फिल्मी धुन दोहराते हो। फर्क क्या है? तुम दोनों मंत्र जप रहे हो। और राम-राम जपने वाला कम से कम तुमसे बेहतर मंत्र जप रहा है।
ठंडा पानी जब छूता है शरीर को,मंत्र जपने की इच्छा अचानक होती है। मंत्र जप लेने से ठंढा पानी भूल जाता है। तुम मंत्र में लग गए हो,जल्दी से पानी ठंढा डाल लिया। लेकिन जब जपना ही है कुछ,तो फिल्मी गाने के बजाय अच्छा था कि राम का स्मरण हो जाता। कौन जाने आकस्मिक स्मरण में कभी-कभी द्वार भी खुल जाते हैं।
तो मैं तुमसे कहता हूं कि घबड़ाओ मत,विधियों का उपाय कर लो। विधियों को सुंदरतर करते जाओ,श्रेष्ठतर करते जाओ। विधियों को शुभ और शिव होने दो। और एक दिन शुद्ध होते-होते-होते-होते वह घड़ी जरूर आ जाती है,जब तुम विधियों के पार चले जाओगे। जाना तो विधि के पार ही है। क्योंकि विधियों से मिलती है सविकल्प समाधि, विधियों के पार जा कर मिलती है निर्विकल्प समाधि।
विधियां कितने दूर ले जाये, मंजिल थोड़े फासले पर रह जाती है। विधि का और मंजिल का फासला रह जाता है। विधि तुम्हारे और मंजिल के बीच में खड़ी रह जाती है।
ऐसा समझो कि राम-राम जपने का खूब अभ्यास हो गया। अब एक दिन राम के सामने पहुंच गए,तुम राम-राम ही जपे जा रहे हो। रामचद्रजी वहां बड़े है हाथ जोड़े तुम राम ही राम जपे जा रहे हो। वे कहते है:भई अब चुप भी हो,अब मैं आ गया। मगर तुम छोड़ो कैसे? तुम कहते हो:मंत्र तो मैं छोड़ नहीं सकता। तो तुम्हारा राम-राम जपना ही बाधा हो जायेगा। जब राम प्रगट हो जाएं,फिर क्या राम जपना। राम को पुकार लो,लेकिन जब घड़ी घटने लगे,फिर पुकार बंद कर देना। कहीं ऐसा न हो कि पुकार विक्षिप्त हो जाए और तुम चिल्लाते ही रहो।तुम्हारा चिल्लाना ही फिर बाधा बन जाएगा। फिर तुम्हारे मंत्र ही बाधा बन जायेंगे।
जो एक साधक हैं,वही एक दिन बाधक बन जाता है। तो कोई चीज न तो सिर्फ साधक है न सिर्फ बाधक है। हर चीज का उपयोग कर लेता है समझदार आदमी।
जीवन आधार बिजनेस सुपर धमाका…बिना लागत के 15 लाख 82 हजार रुपए का बिजनेस करने का मौका….जानने के लिए यहां क्लिक करे

Related posts

स्वामी राजदास : सत्य की यात्रा में

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—104

Jeewan Aadhar Editor Desk

स्वामी राजदास:साधुता की कसौटी

Jeewan Aadhar Editor Desk