पानीपत (प्रवीण भारद्वाज)
सरकार भले ही विकास योजनाओं में पारदर्शिता की बात करती हो लेकिन धरातल पर उसे लागू करने को लेकर अधिकारी तनिक भी गंभीर नहीं है। पीएम आवास योजना भी अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी का शिकार हो गया है। अभी तक किसी भी गांव में पात्रता तय करने के लिए कोई खुली बैठक नहीं की गई है। वंही सरकार के निर्देश के बाद हर आवासीय सिटी में गरीबों के लिए प्लाट तो काटे गये, लेकिन मुलभूत सुविधाएं देने में प्रसाशन के साथ कालोनाइजर भी फेल रहे है। ऐसे में सुविधाएं पाने के लिए प्लाट धारक अब एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक दर – दर भटकने को मजबूर हो गए है।
दरअसल, अंसल सिटी में काफी समय से लोगों को कब्जा दे दिया गया था। लेकिन कब्जा देते समय यहां पर ना तो बिजली के कनैक्शन दिए गए और ना ही पेयजल और सिवर की सुविधा सुचारु रुप से दी गई। इसके बाद से यहां के लोग कभी बिजली कार्यालय तो कभी जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में तो कभी उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काट रहे है। लेकिन इनकी समस्या का समाधान कहीं से नहीं हो पा रहा है।
उपायुक्त के निर्देश के बाद बिजली निगम में 6 लाख रुपए का डीडी भी जमा करवा दिया गया लेकिन इसके बाद भी यहां बिजली कनैक्शन के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई गई है। निगम ने 720 में से केवल 40 घरों की दिवार पर बिजली के मीटर टांग दिए लेकिन उनमें बिजली आज तक नहीं छोड़ी है।
कॉलोनी की महिलाओं ने आरोप लगाए कि अंसल द्वारा प्लाट देते समय कहा था कि कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा। लेकिन अब उन्हें मरम्मत, पेयजल व अन्य सुविधाओं के पैसे जल्द जमा करवाने के नाम पर परेशान किया जा रहा है। परेशान महिलाओं ने कहा कि जल्द उनकी समस्याओं का हल नहीं हुआ तो वे बच्चों सहित रोड पर धरना देने को मजबूर हो जायेगी। अगर इसी प्रकार गरीब अपने अधिकारों से वांछित रहे तो देश के प्रधानमंत्री का सपना हर घर को छत, हर घर को रौशनी कैसे मिलेगी..और कैसे बनेगा मोदी के सपनों का भारत।