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हरियाणा सरकार खोलेगी खुद की बैंकिंग कंपनी, बैंकों में पड़े 7500 करोड़ रुपयों से टूटी सरकार की नींद

चंडीगढ़,
हरियाणा सरकार अब खुद की बैंकिंग कंपनी खोलने की तैयारी में है। यह कंपनी हरियाणा राज्य वित्तीय सेवा लिमिटेड होगी जो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी कहलाएगी। सरकार इस कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक के साथ पंजीकृत कराएगी, ताकि इसे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में काम करने की स्वतंत्रता हो।

दरअसल, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के करीब 7500 करोड़ रुपए बैंकों में पड़े हुए हैं जिनका कोई इस्‍तेमाल नहीं पा रहा है। करीब 257 बैंक खातों में जमा यह पैसा बरसों से जमा है और इनमें ज्यादा लेनदेन तक नहीं हो रहा है। सरकारी योजनाओं को चलाने के लिए पैसे के विभिन्न स्रोत तलाश रहे वित्त विभाग के सामने यह तथ्य आया है। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार का करोड़ों का डिपॉजिट बैंकों में पड़ा रहे, इसके लिए कुछ बैंक और राज्य सरकार के अधिकारी पूरे मामले को दबाए बैठे रहे।

ये वे बैंक खाते हैं जिन्हें बैंकों ने अफसरों के साथ सांठगांठ करवाकर बरसों पहले न केवल खुलवा लिए थे बल्कि इसमें मोटी रकम तक जमा करवा दी थी। कई विभागों ने तो मल्टीपल खाते खुलवा लिए थे। बेशक इसका फायदा विभागों को ब्याज के रूप में हो रहा था लेकिन इतनी मोटी रकम से बैंक भी मालामाल हो रहे थे। सूत्रों के मुताबिक यह तथ्य सामने आते ही अब वित्त विभाग चौकस हो गया है।

कहा जा रहा है कि जल्द ही ऐसे तमाम बैंक खातों की मैपिंग करवाने की तैयारी है ताकि ऐसे खाते बंद करवाकर पैसा वापस सरकार के पास आ जाए और इसका सदुपयोग हो सके। उधर, प्रदेश के वित्त प्रबंधन पर नजर रख रहे विभाग की निगाह विभागों में घपला कर गबन करनेवाले मामलों पर भी आ गई है। विभाग ऐसे मामलों में सरकार को लग रहे चूने से बचाने के लिए हरेक विभाग के बजट का पूरा सिस्टम ही ऑनलाइन करने की तैयारी में है।

यह ऑनलाइन सिस्टम बुधवार को वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने लांच कर दिया। वित्त मंत्री ने बताया कि इस ऑनलाइन सिस्टम की शुरुआत हेल्‍थ डिपार्टमेंट से की जाएगी। इस सिस्टम के बारे में उन्होंने बताया कि अब यदि किसी विभाग को किसी योजना के लिए पैसे की जरूरत होगी तो उसे ऑनलाइन मोड पर आकर अप्‍लाई करना होगा। ऑनलाइन जानकारी वित्त विभाग को मिलेगी और पूरी प्रक्रिया अपनाने के साथ ही पैसा विभाग को ट्रांसफर हो जाएगा।

वित्त मंत्री ने इस सिस्टम के जरिए हेल्‍थ डिपार्टमेंट और नैशनल हेल्‍थ मिशन को 84 करोड़ 58 लाख रुपए जारी भी कर दिया। इस मौके पर वित्त विभाग के साथ-साथ हेल्‍थ डिपार्टमेंट के आला अफसर भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हर वक्त पैसे को ट्रैक किया जा सकेगा। इसके अलावा विभागों द्वारा मिले हुए बजट को इस्तेमाल न करने की समस्या से भी निजात मिल जाएगी। इसका कारण यह है कि जबतक पुराना पैसा इस्तेमाल में नहीं आएगा, तबतक नए बजट के तहत पैसा नहीं मिलेगा।

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