हिसार

इनेलो ने पहली बार नहीं निकाला विधानसभा में जूता, पुरानी आदत : जेपी

हिसार,
कलायत से निर्दलीय विधायक एवं हिसार के पूर्व सांसद जयप्रकाश ने विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला व विधायक करणसिंह दलाल के मामले को सुलझाने की बजाय इसे बढ़ावा देने के लिए सत्तापक्ष व विपक्ष को जिम्मेवार ठहराया है। उन्होंने कहा कि इस घटना को रोका जा सकता था, लेकिन सत्तापक्ष व प्रमुख विपक्षी दल ने केवल दलाल को निष्कासित करने के लिए उन्हें निशाने पर रखा, जो निंदनीय है। वास्तव में इस मामले में सत्तापक्ष व विपक्ष ने जो गठजोड़ किया, वह लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कटाक्ष किया कि विधानसभा में जूते निकालना इनेलो विधायकों की पुरानी आदत रही है, इसलिए उनके जूते बाहर खुलवाने का सुझाव वे मुख्यमंत्री को देंगे।

लोक निर्माण विश्राम गृह में पत्रकारों से बातचीत में जयप्रकाश ने कहा कि किसी सदस्य को एक साल के लिए सदन से निलंबित रखना, उसके हलके की जनता का अपमान व अनदेखी है। यदि सरकार इस मामले में पाक साफ है तो इस पूरे प्रकरण की वीडियो कैसेट जनता के सामने रखें और जांच के लिए कमेटी बनाएं, ताकि पता चल सके कि कौन सही है और कौन गलत है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष ही सत्तापक्ष के साथ मिल गया तो फिर विपक्ष की भूमिका का क्या औचित्य रह जाएगा। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के नेता विधायक करणसिंह दलाल की तरफ जूता निकाला, तब हरियाणा वास्तव में कलंकित हुआ है लेकिन सरकार व विपक्ष को इसकी चिंता नहीं है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में जूते निकालना इनेलो नेताओं की पुरानी आदत है, इससे पहले वर्ष 2001 में भी इनेलो के एक सदस्य ने विधानसभा में जूता निकाल लिया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मसले पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर मामले को तनावपूर्ण बनाने की बजाय सौहार्दपूर्ण बनाना चाहिए और यदि उनका सुझाव लिया गया तो वे सुझाव देंगे कि भविष्य में विधायक विधानसभा में जूते पहन कर न आएं क्योंकि जूते को तो इन लोगों ने हथियार बना लिया है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले का हल नहीं निकाला गया तो वे खुद विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने पर विचार कर सकते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वे हिसार से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि कलायत से विधानसभा का चुनाव लडऩा पसंद करेंगे।

विधायक जयप्रकाश ने कहा कि वास्तव में विधायक करण सिंह दलाल कह रहे थे कि बीपीएल सूची से 25 लाख गरीब परिवारों के नाम कटे गये हैं, जो गलत। उनकी इस बात का जवाब भी संबंधित मंत्री दे रहे थे, लेकिन साथ ही विपक्ष के सहयोग से विधायक दलाल को निष्कासित करने की योजना बनाने लगे। विधानसभा उपाध्यक्ष ने इस दौरान हुई नोक-झोंक को विधानसभा की कार्रवाही से बाहर करने की बात भी कही, लेकिन इसके बावजूद सत्तापक्ष ने फिर इस मसले को उठा दिया और संसदीय कार्य मंत्री ने उनके निष्कासन का प्रस्ताव पढ़ दिया और विपक्ष के नेता की ओर इशारा करके कहा कि विपक्ष के नेता से भी उनका पक्ष जान लिया जाए। इतना कहने की देर थी कि विपक्ष के नेता ने भी सरकार के प्रस्ताव का समर्थन कर दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडा ने वरिष्ठ सदस्य की हैसियत से करण सिंह दलाल की टिप्पणी पर माफी मांगकर सदन सही ढंग से चलाने की बात कही, लेकिन उनकी बात को भी नहीं सुना गया। जेपी के अनुसार उन्होंने भी ऐसी ही बात कही, लेकिन सत्तापक्ष व इनेलो पर तो जैसे करण सिंह दलाल को निष्कासित करने का भूत सवार था, जो उन्होंने कर दिया।

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