हिसार,
हरियाणा सरकार द्वारा परिवहन विभाग में प्रदेश की आबादी के अनुसार सरकारी बसों का विस्तार करने एवं कर्मचारियों की नियमित भर्ती करके बेरोजगार युवाओं को स्थाई रोजगार देने की बजाय 700 निजी बसें ठेके पर लेने के खिलाफ जारी रोडवेज कर्मचारियों के आंदोलन को मिल रहे प्रदेश की जनता के समर्थन से प्रदेश सरकार बुरी तरह से बौखला चुकी है। इसी बौखलाहट का परिणाम है कि चंडीगढ़ के वातानुकूलित कार्यालयों में बैठे अधिकारियों द्वारा नये-नये कर्मचारी विरोधी फरमान जारी किये जा रहे हैं।
यह बात रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य दलबीर किरमारा एवं रमेश सैनी ने एक संयुक्त बयान में कही। उन्होंने कहा कि कभी अधिकारी ओवरलोडिंग के नाम पर चालकों-परिचालकों को जिम्मेवार ठहराते हैं तो कभी वे बसों की खिड़की में यात्रियों के खड़े रहने का जिम्मेवार भी चालकों-परिचालकों को ठहराते हैं और इस संबंध में पत्र जारी करते हैं। जगजाहिर है कि विभाग में बसों व स्टाफ की भारी कमी है, जिसके चलते रोडवेज के चालकों-परिचालकों को मजबूरन 12 से 18 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है, और यात्रियों को उनके गंतव्य स्थान तक ये कर्मचारी पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास जनता को देने के लिए ये जवाब नहीं है कि वह 700 बसें ठेके पर क्यों ले रही है, जबकि परिवहन विभाग के विभिन्न डिपुओं में पहले से ही लगभग 1500 बसें रखरखाव के अभाव में खड़ी है। यदि इन बसों को चलाया जाए तो बसों की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है, लेकिन इनको चलाने का प्रयास नहीं किया जा रहा।
उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार जनता की भावनाओं को ही नजरअंदाज करते हुए परिवहन विभाग को निजी हाथों में देने पर तुली हुई है, जिसका खामियाजा उसे आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग के निजीकरण के खिलाफ रोडवेज कर्मचारी माननीय हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे वहीं जनता की अदालत में भी जाएंगे और प्रदेशभर के गांव, मोहल्लों व शहर तक जाकर सरकार की नीतियों की पोल खोलेंगे।