हिसार,
नागरिक सुरक्षा विभाग द्वारा आजकल एफसी कॉलेज की छात्राओं को विभिन्न आपदाओं के अवसर पर बचाव के तरीकों के बारे में पारंगत किया जा रहा है। इसके लिए महाविद्यालय परिसर में एक सप्ताह का नागरिक सुरक्षा एवं आपदा राहत प्रशिक्षण चलाया जा रहा है जो 13 जनवरी तक चलेगा।
नागरिक सुरक्षा एवं आपदा राहत प्रशिक्षण के दौरान आज प्रशिक्षक देवीदयाल ने छात्राओं को हाई एक्सप्लोसिव बम एवं आग लगाने वाले बमों के बारे में जानकारी देते हुए इनके प्रभाव व बचाव के तरीके भी डेमो के माध्यम से बताए। उन्होंने छात्राओं को आपातकाल में बचाव के तरीकों, बाढ़, सूखे, भीषण आगजनी, भूकंप, भीषण वर्षा, भयंकर तुफान, चक्रवात, भगदड़, अफवाह के दौरान मची अफरा-तफरी, आतंकी घटनाओं, बम ब्लास्ट, प्लेन क्रैश, हाइजेकिंग तथा घायल को चिकित्सा मदद देने के बारे में विधिवत् रूप से प्रशिक्षित किया।
प्रशिक्षक विष्णु कुमार ने छात्राओं को आग लगने पर बचाव कार्य करने, क्षतिग्रस्त भवन में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के बारे में भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कई बार अचानक आपदा आने से नागरिकों के हाथ-पांव फूल जाते हैं और वे दूसरों की सुरक्षा तो दूर, अपनी खुद की सुरक्षा भी नहीं कर पाते हैं। इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से नागरिक सुरक्षा विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को राहत प्रबंधों की बचाव उपायों की जानकारी देना है। यदि नागरिक पहले से सजग होंगे तो वे तुरंत सक्रिय होकर जान-माल के नुकसान को कम कर सकेंगे।
प्रशिक्षक विवेक ने छात्राओं को समझाया कि आपदा किसी भी समय और कहीं भी आ सकती है लेकिन यदि हम जागरूक और सजग हैं तो इससे आसानी से बचाव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के समय हमें हौसला बनाए रखना है और अपने साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा की भावना मन में रखनी है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय विभिन्न क्षेत्रों में निपुण व्यक्ति नागरिक सुरक्षा सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रदीप टीम ने कहा कि आपदा किए व्यक्ति विशेष नहीं, पूरे राष्ट्र के लिए नुकसानदेह साबित होती है। हर व्यक्ति को इसका सामना करने और दूसरों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए। महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इंचार्ज डॉ. सीमा गुप्ता व अल्पना गुप्ता ने कहा कि आपदाओं को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए। आपदाओं के समय हमें तन, मन व धन से बचाव कार्य में सहयोग करना चाहिए। शिविर के दौरान छात्राओं को आपदा बचाव के डेमो देकर व उन्हें इस प्रक्रिया में भागीदार बनाकर विधिवत् रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।