हिसार,
मदुरई में आयोजित यूनिवर्सिटी ऑफ मालदीव की सार्क देशों के लिए आयोजित कांफ्रेस में जिले के गांव कुलाना निवासी शिक्षक डॉ. संदीप कुमार सिंहमार ने सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन, नशामुक्त समाज पर विशेष जोर विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। इस कांफ्रेंस में सार्क देशों के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। कांफ्रेस में संदीप कुमार सिंहमार का शोधपत्र सर्वश्रेष्ठ चुना गया। अपने शोध पत्र की प्रस्तुति में डीपीएस डाटा व भारत स्कूल खरड़-अलीपुर से जुड़े शिक्षाविद डॉ. संदीप कुमार सिंहमार ने कहा कि वर्तमान में समूचा विश्व किसी न किसी रूप में सामाजिक बुराइयों के जाल में उलझा हुआ है।
इन कुरीतियों को दूर करने के लिए प्रत्येक देश की सरकार के साथ साथ हर व्यक्ति का भी कर्तव्य बनता है। सांझे प्रयास से ही इन बुराइयों को दूर किया जा सकता है। इसके लिए हमें तकनीकी युग के इस दौर में भी सामाजिक रीति-रिवाजों को जमीनी स्तर पर अपनाना होगा,ताकि बच्चे व युवा संस्कारित बन सके। बच्चे के पहले शिक्षक माने जाने वाले माता-पिता,दादा-दादी/अभिभावकों को किशोरावस्था में बच्चों से दोस्ताना व्यवहार अपनाकर शूरवीरों,महापुरुषों व संत महात्माओं की कहानी सुनानी चाहिए। इसके साथ-साथ सरकार को भी प्राईमरी एजुकेशन में सामाजिक विषयों को शामिल करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चों को बचपन से ही सामाजिक कुरीतियों विशेषकर नशों से घृणा होने लगेगी। डॉ. संदीप कुमार सिंहमार ने कहा कि नशा युवा वर्ग को दिशाहीन बना रहा है, नशे की चपेट में आकर व्यक्ति अपने-पराए सबसे दूर होने की कौशिश करता है। कई बार नशे से आतंकवाद को बढ़ावा भी मिलता है। इससे स्वास्थ्य खराब होने के साथ-साथ आर्थिक हानि भी होती है। नशा चाहे किसी भी रूप में लिया जाए उसका वही रूप आम इंसान व देश-दुनिया के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि शराब रूपी बोतल के बंद पानी में लाखों लोग बह चुके हैं फिर भी शराब को सरकारी तौर पर नशा नहीं माना जाता। इस दिशा में भी सत्तासीन सरकारों को सोचने की जरूरत है ताकि युवाओं को दिशाहीन होने से बचाया जा सके।