हिसार

जिला में अभी तक कोरोना वायरस से संक्रमण का एक भी मामला नहीं : उपायुक्त

कोरोना के संबंध में अनाधिकृत सूचना का प्रकाशन व प्रसारण करना दंडनीय अपराध

महामारी रोग अधिनियम के अंतर्गत नियमों की पालना करना अनिवार्य

हिसार,
हरियाणा सरकार द्वारा कोरोना (कोविड-19) को महामारी रोग घोषित करने के बाद महामारी रोग अधिनियम-1897 के अंतर्गत इसके संबंध में भ्रामक प्रचार करना तथा अनाधिकृत रिपोर्ट का प्रसारण या प्रकाशन करना दंडनीय अपराध है। ऐसा करने से आमजन के बीच दहशत का माहौल पैदा होता है, इसलिए ऐसा करने वाले व्यक्ति, संस्थान व संस्था के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला में अभी तक कोविड-19 कोरोना वायरस से संक्रमण का एक भी मामला संज्ञान में नहीं आया है।
उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि कोरोना वायरस रोग को हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा महामारी रोग (कोविड-19) घोषित करते हुए इसके नियंत्रण हेतु राज्य स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक व मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक को तथा जिला स्तर पर उपायुक्त, सिविल सर्जन, एसडीएम तथा जिला के सीनियर मेडिकल ऑफिसर्स को अधिकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि महामारी रोग अधिनियम के अंतर्गत कोरोना वायरस के संबंध में किसी प्रकार के भ्रामक प्रचार को रोकने के लिए कोई व्यक्ति, संस्थान व संस्था हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग की पूर्व अनमति के बिना कोरोना वायरस से संबंधित समाचार अथवा सूचना को प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया में प्रकाशित व प्रचारित नहीं कर सकता है। इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त व्यक्ति, संस्थान व संस्था के खिलाफ जिला उपायुक्त अथवा स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा भारतीय दंड संहिता (1860 के 45) के सेक्शन 188 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. प्रियंका सोनी ने आमजन से भी आह्वïान किया है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित कोराना से जुड़ी गलत सूचनाओं व अफवाहों पर ध्यान न दें और इन्हें फैलने से रोकने में प्रशासन का सहयोग करें। लोग इस संबंध में जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारिक प्रवक्ताओं द्वारा जारी सूचनाओं व जानकारियों का अनुसरण करें। उन्होंने कहा कि आमजन कोरोना रोग से संबंधित व्हाट्स-एप ग्रुप अथवा अन्य सोशल मीडिया माध्यमों की सूचनाओं को आगे फॉरवर्ड न करें। व्हाट्स-एप गु्रप, यू-ट्यूब या किसी अन्य सोशल मीडिया पर कोई भी व्यक्ति अफवाहें व भ्रामक प्रचार करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उपायुक्त ने बताया कि अधिनियम के अनुसार जिला के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना रोग के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए अपने परिसर में फ्लू कॉरनर बनाए जाने अनिवार्य है। कोई भी निजी लेबोरेटरी कोविड-19 का टेस्ट सैंपल लेने के लिए अधिकृत नहीं है। इस प्रकार के सभी सैंपल भारत सरकार की गाइडलाइंस के अंतर्गत ही लिए जा सकते हैं जिन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा नामित डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर के माध्यम से निर्धारित लैब में ही भेजा जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अधिनियम की समुचित अनुपालना के साथ-साथ कोरोना वायरस पर नियंत्रण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।

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