हरियाणा हिसार

थप्पड़—चप्पल कांड : अनाज खरीद में कमीशन और भ्रष्टतंत्र भी जिम्मेवार, करोड़ों का होता है हर साल खेल

आदमपुर,
आदमपुर के बालसंमध में मार्केट कमेटी के सचिव की थप्पड़—चप्पल से हुई पिटाई में कई और राज खुलकर सामने आने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है भ्रष्ट तंत्र की..किसानों को चूना लगाने की..काफी हद तक ये बात दमदार भी है। अब सोनाली फोगाट भी आरोप लगा रही है कि मार्केट कमेटी सचिव ने काफी पैसा भ्रष्ट तरीके से जोड़ा है।

आदमपुर में हर साल गेहूं, सरसों और कपास में किसानों को बट्टा.. काटा.. के नाम पर करोड़ों रुपयों का चूना लगता है। हर साल इसकी खबरे स्थानीय अखबारों में छपती है। लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं देती। चर्चा तो ये भी रहती है कि जिस पार्टी की सरकार होती है उसके कार्यकर्ता मार्केटी कमेटी से बड़ा खर्चा—पानी वसूल करते रहते हैं। खर्चा—पानी न मिलने पर कई बार तो पावर वाले कार्यकर्ता अधिकारियों को तंग भी करने लगते हैं।
इस साल की बात करे तो आदमपुर में सरसों की खरीद आरंभ हुई तो कमीश्नर के आगे ही किसानों ने अधिकारियों व प्रचेजर पर वजन से ज्यादा सरसों बट्टा के नाम पर लेने की शिकायत की। कमीश्नर ने इस पर एक अधिकारी को धमकाया भी…लेकिन आज तक ना तो उस मामले की कोई जांच हुई और ना ही कोई कार्रवाई।

इसके बाद गेहूं खरीद में ऐसे ही परिस्थितियां बनी। भाजपा के कई नेताओं ने (जिसमें सोनाली फौगाट भी शामिल थी) मार्केट कमेटी कार्यलय से ही सोशल मीडिया पर लाइव होकर अनेक गंभीर आरोप अधिकारियों पर लगाए लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। इसी प्रकार सीसीआई द्वारा कपास की खरीद में काटा काटने का मामला काफी सुर्खियों में रहा। निगरानी कमेटी के लोगों ने काटा का खेल भी उजागर किया—लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई।

हर बार आदमपुर अनाज मंडी में करोड़ों रुपयों की हेराफेरी होती है, हर बार आढ़ती हड़ताल पर जाते है..जांच की मांग करते है..लेकिन अधिकारियों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं होती। बाद में चर्चाएं रहती है कि उक्त अधिकारी फलां नेता से जा मिला और सेवा—पानी करके मामले को दबा आया। कभी चर्चा मिलती है कि सत्ताधारी पार्टी के नेता या कार्यकर्ता कमीशन ले गए। ये भी एक सच्चाई है कि आदमपुर में किसी भी अनाज की खरीद की कभी जांच हुई ही नहीं।

यदि सरकार ईमानदारी से आदमपुर में किसी सेवानिवृत्त जज की देखरेख में केवल इसी साल की सरसो, गेहूं और कपास की खरीद की जांच करवाए तो बहुत से नेता और बहुत से अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हो जायेंगे। अकेले आदमपुर ही नहीं सरकार को चाहिए कि पिछले 10 सालों से प्रदेश में हैफड, खाद्य आपूर्ति और मंडी बोर्ड के खरीद में लगे अधिकारियों व कर्मचारियों के परिवार की सम्पति की जांच करवाये—इससे ना केवल भ्रष्ट तंत्र की कमर टूटेगी बल्कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं के कारण बार—बार बेइज्जती का शिकार होने वाले ईमानदार अधिकारियों, कर्मचारियों और नेताओं की सही तस्वीर भी जनता के सामने आ पायेगी।

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