तिरंगे झंडे को केवल हाथ में ही नहीं उठाया बल्कि उसके सिद्धांतों को जीया है हिन्दुस्तानी ने
बुआ—मामा के बच्चों की शादी में तिरंगा लाने पर मना करने पर शादी में नहीं गए हिन्दुस्तानी
हिसार,
जागो मानव बनो इंसान संस्था के अध्यक्ष व सामाजिक कार्यकर्ता गंगापुत्र राजेश हिन्दुस्तानी को तिरंगा झंडा रोजाना हाथ में 15 से 20 घंटे उठाए 2828 दिन हो गए हैं। 19 नवंबर 2012 से रोजाना झंडा उनके हाथ में लोगों को राष्ट्रभक्ति सेवा भाव व देश के शहीदों के सपनों व सम्मान को पूरा करने के लिए 2828 दिनों से प्रेरित करता रहता है। वैसे तो 10-12 साल से झंडा वे रखते रहे लेकिन रोजाना वर्ष 2012 से उनके हाथ में है। इस दौरान कई धमकियां, गालियां, लोगों ने उन्हें पागल कहा, मारपीट की, उन्हें कई पार्टी के लोगों, संगठनों व असामाजिक तत्वों से काफी प्रताडऩा सहनी पड़ी पर उन्होंने तिरंगा झंडा और देशभक्ति नहीं छोड़ी। शुरू में तो उन्हें हुड्डा सरकार के दौरान क्रांतिकारी समझ अधिकारी और नेताओं के यहां तिरंगा लेकर जाने पर पाबंदी लगती थी और उनकी कई गिरफ्तारियां हुई और अधिकारियों नेताओं ने उन्हें प्रताडि़त भी किया पर उन्होंने तिरंगा झंडा देश को जागृत करने हेतु लगातार थामे रखा है जो अपने आप में एक बेमिसाल कार्य है। बसों, ट्रेनों, कार, शादी समारोह, धार्मिक, सामाजिक समारोह में उनके हाथ में झंडा रहा और मामा और बुआ के लडक़ों की शादी में झंडा घर रखकर आने की शर्त पर वे और उनकी माता उनकी शादी तक में नहीं गए।
हिन्दुस्तानी ने शहीद मदन लाल ढींगड़ा के शहीदी दिवस पर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके बलिदान को याद किया। वहीं हिन्दुस्तानी ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें भी नमन किया। इस मौके पर अरुण, राजेंद्र, मनोहर लाल व शुभम आदि मौजूद थे।
हिन्दुस्तानी ने बताया कि वे लोगों को राष्ट्रप्रेम, सेवा, एकता, भाईचारा में जोड़ते हैं वंदे मातरम, जय हिन्द लिखी टोपी पहने, तिरंगा हाथ में देख जहां लाखों लोगों ने सात वर्षों में उन्हें पागल कहा। वहीं, आज जयहिंद, वंदेमातरम, भारत माता की जय, इंकलाब जिंदाबाद, हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे उन्हें देखकर लोग लगाते हैं। विपरीत हालात, आंधी, तूफान, बारिश व सफर कैसी भी विपरीत हालत में उन्होंने देश के झंडे की आन-बान-शान को ऊंचा रखा। जहां लोग अपनी पार्टियों, संस्थाओं के झंडे उठाते थे व उनके वहां तिरंगे को लाने पर रोकते थे वही पार्टियां और संस्थाएं तिरंगा रैलियां निकालने लगी हैं जो हिन्दुस्तानी के 7 राज्यों के कई गांवों शहरों में हमेशा तिरंगा साथ रखने पर ये संभव हुआ। हिन्दुस्तानी ने कहा कि तिरंगा झंडा उठाएं पर उसका अपमान न होने दें। कुछ देर के लिए तिरंगे उठाते हैं या बच्चों को देते हैं वो कहीं भी उसे गिरा देते हैं ये कोई मनोरंजन की वस्तु नहीं देश के झंडे का सम्मान करना हमारा फर्ज है और हमें किसी भी हाल में इसकी गरिमा को ठेस नहीं पहुंचने देनी चाहिए।