धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—207

सालों पहले कृष्णा राज्य में एक राजा का राज हुआ करता था। वो राजा काफी हट्टा-कट्टा और स्वस्थ था। उसे सबसे ज्यादा कुछ पसंद था, तो वो था खाना। उसे हर दम कुछ-न-कुछ खाने का ही मन करता था। हर दम खाते रहने से उस राजा को मोटापे की परेशानी हो गई। होते-होते मोटापा इतना बढ़ गया कि वो राजा बीमार रहने लगा। हर बार डॉक्टर राजा को खाना कम खाने की सलाह देते थे, ताकि राजा का मोटापा कुछ कम हो सके, लेकिन राजा अपने खाने की आदत को कम नहीं कर पा रहा था।

एक दिन दोबारा उसने एक डॉक्टर को दिखाया, उसने भी राजा को खाना कम करने की ही सलाह दी। इस बात से राजा को काफी तेज गुस्सा आ गया। उसने गुस्से में राज्य में एलान करा दिया कि जो मेरा अच्छा इलाज करेगा, उसे मुंह मांगी रकम दी जाएगी। इस एलान के साथ राजा ने एक शर्त भी रखी कि जो भी उसके इलाज में नाकाम होगा उसके सिर को कटवा दिया जाएगा।

तभी एक बुद्धिमान ज्योतिष ने यह भविष्यवाणी कर दी कि कृष्णा राज्य के राजा के पास सिर्फ एक महीने का ही समय बचा है। एक महीने में उनके जीवन का अंत हो जाएगा। इस भविष्यवाणी को जानते ही राजा परेशान हो गया। डर के मारे अब उसे नींद ही नहीं आती थी।

राजा ने भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिष को जेल में डलवा दिया। राजा ने अपने सिपाहियों से कहा कि इसे महीने भर के लिए कैद कर लो। इससे यह पता लग जाएगा कि इसकी भविष्यवाणी कितनी सही व कितनी गलत है।

भले ही राजा ने ज्योतिष को जेल में डाल दिया हो, लेकिन उसके मन का डर बीतते दिनों के साथ बढ़ता ही जा रहा था। डर के मारे राजा का खाना-पीना भी कम हो गया। अपनी मौत की चिंता की वजह से राजा की भूख मर सी गई थी। होते-होते एक महीना बीतने को आया। राजा अपनी मौत की चिंता और डर के चलते ज्यादा खा नहीं रहा था, जिस वजह से उसका वजन भी पहले से कम हो गया।

जैसे ही एक महीना खत्म हुआ राजा ने उस ज्योतिष को जेल से बाहर निकालने का आदेश दिया। जैसे ही सिपाही उसे राजा के पास लेकर आए, तो उन्होंने उससे पूछा कि आखिर क्यों तुमने ऐसी भविष्यवाणी की थी? देखो! मैं आज भी जिंदा हूं। तुम्हारी भविष्य वाणी झूठी साबित हो गई है। अब मैं तुम्हारा सिर कटवा दूंगा, ताकि तुम आगे से ऐसी गलत भविष्यवाणी करके लोगों को परेशान न कर सको।

मुस्कुराते हुए ज्योतिष ने राजा से कहा कि मुझे कुछ भी कहने से पहले आप एक नजर शीशे पर डाल लीजिए। देखिए कि सिर्फ और सिर्फ मेरी भविष्यवाणी की वजह से आज आपका शरीर कैसा हो गया है और जिस दिन मैंने भविष्यवाणी की थी, उस दिन आप कैसे थे। आज आप खुद को आइने में देखकर पहले से स्वस्थ कह सकते हैं। आपका वजन बढ़ने के बजाए घटा ही है।

ज्योतिष की बात सुनते ही राजा ने शीशे की तरफ देखा। खुद को देखकर राजा हैरान हो गए। उन्हें काफी खुशी हुई। उन्होंने कहा कि एक महीने से अपनी मौत की भविष्यवाणी सुनकर मैं इतना परेशान हो गया था कि खुद को एक नजर देख तक नहीं पाया। सच में पहले के मुकाबले मेरे वजन में काफी अंतर आया है।

राजा को जवाब देते हुए तुरंत ज्योतिष ने कहा, ‘आपका असली डॉक्टर मैं हूं। मैंने आपका वजन कम कर दिया है और उपचार भी एकदम वैसा हुआ जैसा आपने चाहा। मैंने सिर्फ आपको एक डर दिखाया। मैं कोई ज्योतिष नहीं हूं। सिर्फ ज्योतिष बनकर आपकी परेशानी का हल कर रहा था। मैंने एक डर दिखाया और आपने खाना कम कर दिया। नतीजन आज आप पहले के मुकाबले स्वस्थ लग रहे हैं।

राजा को उसकी बात एकदम सही लगी। उन्होंने अपने वादे के अनुसार उसे मुंह मांगा इनाम दिया। इनाम देने के बाद राजा ने थोड़ा सोचा कि जब मौत के डर के कारण खाना कम करने से स्वास्थ्य पर इतना सुधार हुआ है, तो अधिक खाना नहीं चाहिए। यह सोचते ही राजा ने निश्चय कर लिया कि आगे से कभी जरूरत और भूख से ज्यादा खाने का सेवन वो नहीं करेगा।

देखते-ही-देखते राजा की सेहत एकदम ठीक हो गई। उनका वजन नियंत्रित रहने लगा और जिन बीमारियों से वो परेशान थे वो कम हो गईं।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, सबसे बड़ा डर मौत का होता है। मौत को पास देखकर इंसान सबकुछ भूल जाता है। दूसरी सीख ये कि भूख से ज्यादा खाने से इंसान बीमार हो जाता है, इसलिए सीमित मात्रा में ही भोजन करना चाहिए।

Related posts

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—156

स्वामी सदानंद के प्रवचनों से—246

सत्यार्थप्रकाश के अंश—02

Jeewan Aadhar Editor Desk