हिसार

महावीर जयन्ती पर शासन श्री मुनि ने कहा – प्रमाद से बचना ही महावीर का संदेश

आदमपुर,
भगवान महावीर का 2620वां जन्म कल्याणक दिवस महावीर जयन्ती समारोह के रूप में माॅडल टाउन स्थित तेरापंथ सभा भवन में मनाया गया। इस अवसर पर महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी के आज्ञानुवर्ती शासनश्री मुनि विजय कुमार जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा – भगवान महावीर इस युग के 24वें तीर्थंकर हुए। 30 वर्ष की उम्र में दीक्षा लेकर वे ध्यान और तपस्या में लग गये। लगभग साढ़े बारह वर्ष के पश्चात उन्हें परम ज्ञान की उपलब्धि हुई। वे त्रिकालदर्शी बन गये। अपनी आत्मा में रमण करने वाले महावीर विश्व के समस्त चराचर प्राणियों के साथ जुड़ गये। सबके हित और कल्याण के लिए उन्होंने उपदेश देना प्रारम्भ किया। उनका कथन था, हर व्यक्ति भयमुक्त और सुरक्षित जीवन जीना चाहता है। इसके लिए जरूरी है, वह प्रमाद से बचे, क्योंकि प्रमत्त व्यक्ति को चारों ओर से खतरा रहता है और जागरूक व्यक्ति बहुत सारे खतरों से स्वयं को बचा लेता है।

अध्यात्म के क्षेत्र में यह जितना महत्त्वपूर्ण सूत्र है, उतना ही व्यवहार के धरातल पर महत्त्व रखता है। एक सही घटना का यहां उल्लेख किया जा रहा है जिसे मैंने किसी एक पत्र में पढ़ी थी, एक बच्चा कई दिनों से हाॅस्पिटल में एडमिट था। उसका इलाज डाॅक्टर की देखरेख में चल रहा था। यहां भर्ती होने के दो-तीन दिन बाद से ही वह बार-बार अपने मम्मी-पापा से कहता रहा कि मेरा सिर झल्ला रहा है। डाॅक्टर को बताया तो उसने बिस्तर पर चींटियों को देखकर उसके पापा से पूछा, क्या तुम लोग इसे बेड पर खाना खिलाते हो? उन्होंने बताया-सर्, ऐसा ही करते हैं। डाॅक्टर ने कमरे की साफ सफाई और खाना बेड पर नहीं खिलाने का निर्देश दिया ताकि चींटियों से बच्चे का बचाव हो सके। डाॅक्टर के निर्देश का घर वालों ने पूरा पालन नहीं किया। बच्चे की तकलीफ कम नहीं हुई। उसकी मृत्यु से पूर्व उसका एक्सरे किया गया तो सिर में जीवित व मरी हुई कई चींटियां नजर आई। डाॅक्टर ने रहस्य का उद्घाटन करते हुए कहा-चींटियां बच्चे के कान से भीतर जाती रही, उसी का परिणाम है कि एक्सरे की रिपोर्ट में सिर में चींटियां नजर आ रही थी। उसके माता-पिता अपनी लापरवाही पर बाद में अफसोस करने लगे।

वर्तमान में कोरोना महामारी विकराल रूप लिये हुए है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें टीकाकरण का कार्यक्रम युद्धस्तर पर चला रही हैं किन्तु बचाव के अन्य नियमों का जब तक जागरूकता से पालन नहीं होता है तब तक यह विकट समस्या काबू में आनी कठिन है। भगवान महावीर के उपदेशों से बड़े-बड़े ग्रन्थ भरे पड़े हैं किंतु उनका जागरूकता रखने का एक उपदेश भी यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में उतार ले और कत्र्तव्य में लापरवाही न करे तो मानव जाति की अनेकानेक समस्याओं का समाधान हो सकता है।

कार्यक्रम का प्रारम्भ स्थानीय महिला मण्डल के मंगल गीत से हुआ। भगवान महावीर की अभ्यर्थना में श्रावक श्रीयुत घीसाराम, सभा प्रधान विनोद, सूर्यकान्त, राधेश्याम, कान्ता, संजना, मीनाक्षी, योगिता, रिया, कीर्ति ने गीत व भाषण के द्वारा विचार प्रकट किये। गीत व संवाद में भाग लेने वाले बच्चों की प्रस्तुतीकरण की सबने प्रशंसा की।

मुनि श्री के प्रवास में धार्मिक प्रशिक्षण भी चला। परीक्षण में प्रथम स्थान प्राप्त कीर्ति, द्वितीय स्थान प्राप्त उदित, तृतीय स्थान प्राप्त लक्ष्य व विपुल, अन्य सभी संभागियों को पुरस्कृत किया गया। उर्मिला जैन ने कुशल संयोजन करके व मधुर संगान के द्वारा भाई-बहिनों की वाहवाही लूंटी। चन्द्रावती बहन द्वारा तेरापंथ भवन के लिए भूमि दान के उपलक्ष्य में उनके पुत्र अनिल जैन व पुत्रवधुओं को सम्मानित किया गया।

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