बार-बार अपील के बावजूद एचएयू व लुवास के अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
हिसार,
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय व लुवास के कैंपस परिसर के निवासी बंदरों व कुत्तों के आतंक के साये में जीने को मजबूर है। आलम यह है कि परिसर के निवासियों ने इनके डर से बच्चों को घर से बाहर निकालना ही बंद कर दिया है। प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने पर भी कोई समाधान नही हो सका है।
इस संबंध में गत 19 जून को हौटा की प्रशासन के साथ बैठक में कुलपति के सख्त आदेशों के बाद भी अधिकारियों के कानों पर जूं तक नही रेंगी है। आए दिन बंदरों व कुत्तों के काटने से कई शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारी घायल हो चुके है। हौटा प्रधान डॉ. प्रदीप चहल व लुवास्टा प्रधान डॉ. अशोक मलिक ने बताया कि पिछले दिनों लुवास्टा व हौटा की बैठक में भी फैसला करते हुए दोनों विश्वविद्यालयों के प्रशासन से मिलकर ठोस कदम उठाने की अपील की गई थी लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है। बहुत सारे बंदर घरों में घुसकर सामान को नुकसान तक पहुंचा देते हंै और सडक़ पर घूमने वालों को काटकर घायल कर देते है।
न्यू कैंपस में कुत्ते वाहनों के पीछे लग जाते है और साइकिल व पैदल घूमने वालों को काट लेते है। शहर के लोग जो कैंपस में सुबह शाम घूमने आते है वो एचएयू को एक जंगल समझते है व यहां पर बंदरों को केले व कुत्तों को रोटी डालकर धर्म व पुण्य कमाने का प्रयास करते हैं परंतु वो यह नहीं समझते कि यहां पर विश्वविद्यालय के कर्मचारी, शिक्षक व अधिकारी अपने परिवार के साथ भी रहते है।
हौटा व लुवास्टा ने चेताया है कि अगर समय रहते प्रशासन ने कोई कदम नही उठाया तो भविष्य में ये जानवर कोई जानमाल का भी नुकसान कर सकते है और इस सब की जिम्मेदारी दोनों विश्वविद्यालय के प्रशासन की होगी। हौटा व लुवास्टा ने प्रशासन से अपील की कि वे जल्दी से जल्दी इस ओर सख्त कदम उठाएं व परिसर में रहने वालों को भयमुक्त जीवन जीने को दें। भय यहां तक लगा रहता है कि जो शिक्षक या कर्मचारी, पति, पत्नी दोनों विश्वविद्यालय में कार्यरत हंै और पीछे से बच्चे घर में अकेले हो तो क्या बच्चे सुरक्षित है। बार-बार उन्हें घर जाकर बच्चे संभालने पड़ते हैं जिससे उनके कार्य में भी बाधा उत्पन्न होती है।