हिसार

मूर्धन्य समाजसेवी एवं उच्च कोटि के साहित्यकार थे संतराम बीए : डॉ. संदीप सिंहमार

विश्व मानवाधिकार सुरक्षा आयोग के सदस्य डॉ. संदीप सिंहमार को भेंट किया शोध-ग्रंथ

डॉ. कंवल किशोर ने ‘संतराम बीए के साहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन’ विषय पर हासिल की पीएचडी

हिसार,
शिवाजी कॉलोनी रोहतक निवासी एवं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फतेहगढ़ जींद के हिंदी प्राध्यापक डॉ. कंवल किशोर प्रजापति ने ‘संतराम बीए के साहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन’ विषय पर लिखित अपना शोध-ग्रंथ ‘विश्व मानवाधिकार सुरक्षा आयोग’ के सदस्य डॉ. संदीप सिंहमार को भेंट किया। शोधार्थी कंवल किशोर ने हाल ही में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय अस्थल बोहर, रोहतक से पीएचडी की उपाधि हासिल की है।
खास बात यह है कि युगपुरुष संतराम बीए पर शोध करने वाले पहले शोधार्थी होने का गौरव भी डॉ. कंवल किशोर को ही मिला है। शोध-ग्रंथ प्राप्ति के उपरांत आयोग के सदस्य डॉ. संदीप सिंहमार ने कहा कि संतराम बीए वाकई एक युगपुरुष, क्रांतिचेता व मूर्धन्य समाजसेवी होने साथ-साथ एक उच्च कोटि के साहित्यकार भी थे। साहित्यिक क्षेत्र में उनके द्वारा प्रदत्त ‘मेरे जीवन के अनुभव’, ‘हमारा समाज’, ‘स्वदेश-विदेश यात्रा’ आदि साहित्यिक कृतियां वास्तव में उल्लेखनीय हैं। साथ ही समाज सुधार के क्षेत्र में उनका अपने नाम के साथ किसी भी प्रकार के जाति, धर्म, वर्ग का सरनेम न लगाना व जातपात तोडक़र मंडल का निर्माण भारतीय समाज में परिवर्तन का बहुत बड़ा उद्घोष था, जिसने अपने समय की बहुत सी सामाजिक विद्रूपताओं वंचनाओं को न केवल ध्वस्त किया अपितु आगे के सुधारों के लिए मार्ग प्रशस्त भी किया। डॉ. कंवल किशोर प्रजापति पर गर्व है कि इन्होंने संतराम बीए जैसी हस्ती को अपने शोध के लिए चुना। आज पुन: ऐसा समय आ गया है कि जब संतराम बीए जैसी शख्शियत के आदर्शों को अपनाने की महती आवश्यकता है। इस अवसर पर उमेद सिंह, सावित्री देवी, डॉ. नंदकिशोर, बृजकिशोर, सीमा रानी, दिव्यांशी प्रजापति, वेदांशी प्रजापति व भव्यम मौजूद रहे।

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