हिसार

राजगुरु मार्केट के लक्ष्मीनारायण मंदिर बारे हिंदु जागरण मंच ने सिटी मैजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन

बोले, फर्जी ट्रस्टियों ने बेच दी मंदिर की करोड़ों की जमीन, मामले की जांच करने व केस दर्ज करने की मांग

हिसार,
नागोरी गेट के निकट राजगुरु मार्किट में वर्षों पुराने लक्ष्मीनाराण मंदिर में तालााबंदी व तायल धर्मशाला तोडऩे के विरुद्ध जांच करने व एफआईआर दर्ज करवाने की मांग को लेकर हिंदु जागरण मंच के सदस्यों ने आज जिला उपायुक्त की अनुपस्थिति में सिटी मैजिस्टे्रट को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में मंच के विभाग संयोजक एडवोकेट मनेज चंद्रवंशी, जिला उपाध्यक्ष रविन्द्र गोयल, जिला मंत्री भारत गौतम, प्रमुख भूसंरक्षण दीपक कुमार, आत्मप्रकाश रहेजा एडवोकेट आदि शामिल रहे। ज्ञापन में कहा गया है कि ईश्वर चंद पुत्र हनुमान दास निवासी 231 सेक्टर 14 हिसार व विनोद मित्तल पुत्र मनफूल सिंह मित्तल निवासीगण एमजी 1608, डीएलएफ गोल्फ लिंक, डीएलएफवी सेक्टर 42 गुरुग्राम हरियाणा द्वारा फर्जी ट्रस्टी बनकर मंदिर व धर्मशाला की करोड़ों रुपयों की सम्पत्ति अपने रिश्तेदारों व मिलने वालों के नाम करवा दी है जोकि सरासर गैर कानूनी है। दोनों फर्जी ट्रस्टियों द्वारा षडयंत्र रचकर रजिस्ट्रियां करवाई गई। धर्मशाला को तोडक़र व मंदिर में 6 दिनों से अंदर से ताला लगवा रखा था व मंदिर की रजिस्ट्री नम्बर 14174 दिनांक 22 अक्तबूर 2021 को खाली प्लाट दिखाकर रजिस्ट्री करवाई गई। अब योजना मंदिर को तोडक़र वहां प्लाट बनाने की थी तथा मूर्तियों को कहीं खुर्द बुर्द कर देते। राजगुरु मार्किट के व्यापारियों द्वारा यह मामला हिंदु जागरण मंच के संज्ञान में लाने के बाद 30 दिसम्बर को मंच के कार्यकर्ताओं ने तथा मार्किट के व्यापारियों व विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों द्वारा धरना दिया गया। प्रशासन की आंखें खुलने के बाद मंदिर के ताले खोले गये।
मंच के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में आगे कहा कि मंदिर को प्लाट दिखाकर रजिस्ट्री करवाई गई व धर्मशाला की सात रजिस्ट्रियां अवैध तरीके से करवाई गई। मंदिर के खुलने पर ईश्वर चंद ने पुराने पंडित को नहीं आने दिया। ईश्वर चंद ने अपने मंगाली गांव के मनोज पुजारी को चाबी दे दी जोकि केवल सुबह-शाम वो भी दिखावे के लिये मंदिर खोलता है तथा मंदिर आने वालों से दुव्र्यवहार करता है। फर्जी ट्रस्टियों ने फर्जी डीड नम्बर 11250 द्वारा एक महीने के अंदर ही मंदिर व धर्मशाला की प्रापर्टी को कैथल, करनाल व दिल्ली के लोगों को बेच दिया। मंच ने उपायुक्त से मांग की है कि मंदिर व टूटी हुई धर्मशाला सीपीसी की धारा 93 के तहत अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच करवाई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाकर सख्त कार्रवाई की जाये। उल्लेखनीय है कि दान दी गई सम्पत्ति को ना तो बेचा जा सकता है और ना ही वापिस लिया जा सकता है।

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