हरियाणा हिसार

पुरूष प्रदान समाज को अपनी सोच बदलनी होगी—कविता जैन

हिसार
लिंग समानता के लिए महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक तौर पर मजबूत होना पड़ेगा वहीं पुरूष प्रधान समाज को अपनी मानसकिता में बदलाव लाना होगा तभी इसका सार्थक परिणाम मिलेगा। यह बात हरियाणा महिला एवं बाल विकास, स्थानीय निकाय व सूचना जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग की मंत्री कविता जैन ने जीजेयू में मानव संसाधन विकास केन्द्र द्वारा ‘लिंग संवेदीकरण’ विषय पर आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि सम्बोधित करते हुए कही।
श्रीमती कविता जैन ने कहा कि 21वीं शताब्दी में भी लिंग असमानता का मुख्य कारण अशिक्षा, गरीबी तथा अज्ञानता है। अगर महिलाएं शिक्षित नहीं होगी तो वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हो पाएगी। इसलिए महिलाओं का शिक्षित होना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अंदर की शक्ति को जगाना होगा और अपने अधिकारों को पहचानना होगा। आज की महिलाएं हर क्षेत्र में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है। चाहे वह शिक्षा को क्षेत्र हो, चिकित्सा को क्षेत्र हो, खेल का मैदान हो, सेना का क्षेत्र या अन्य कोई क्षेत्र हो, अंतरिक्ष से लेकर समुन्दर तल तक महिलाएं अपनी अह्म भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने राजनीतिक क्षेत्र के साथ-साथ अन्य सभी क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित किए है। ‘बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए श्रीमती कविता जैन ने कहा कि हमें शिक्षा के लिए मां सरस्वती, धन के लिए मां लक्ष्मी तथा शक्ति के लिए मां दुर्गा की आवश्यकता है तो घर में बेटी की आवश्यकता क्यों नहीं है। उन्होंने कार्याशाला में उपस्थित सभी शिक्षकगणों व गणमान्य व्यक्तियों से आह्वान किया कि सात दिवसीय कार्यशाला के दौरान निकलने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों को समाज में लेकर जाएं ताकि लिंग समानता वाली सोच के बारे लोगों को अधिक से अधिक जागरूक एवं लिंग संवेदीकरण किया जा सके।
हरियाणा सरकार के मुख्य संसदीय सचिव डा. कमल गुप्ता ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि लिंग संवेदीकरण का मुद्दा समझने का नहीं, बल्कि महसूस करने का है। यदि हम पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं के सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक व अन्य क्षेत्रों में दिए जा रहे योगदान को सही ढ़ंग से समझेंगे तो निसंदेह समाज में लिंग समानता और मजबूत होगी।
इस कार्यशाला में महाराष्ट्र, उत्तराखंड तथा बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के शिक्षक भाग ले रहे हैं।

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Jeewan Aadhar Editor Desk