वासना ही बन्धन है। वासना से रहित होना ही मोक्ष है। वासना का विनाश करने के चार उपाय बताये गए हैं।
1. सतत हिरस्मरण करते रहने से वासना का विनाश होता है।
2. जो कुछ भी है सब परमात्मा का हैं, मेरा कुछ भी नहीं है, ऐसा निरन्तर साचने से वासना का नाश होता है और समर्पण भाव की उत्पत्ति होती है।
3. मुझे परमात्मा से मिलना है, उससे मिलने का साधन भक्ति-ज्ञान, वैराग्य कथा-सुमिरण आदि हैं, इनमें लगा हुआ व्यक्ति एक दिन अवश्यमेव परमात्मा का साक्षात्कार करता है।
4.वासना का विनाश करने के लिए परमात्मा की शरण परमावश्यक है।
परमात्मा की शरण में जाए बिना वासना का विनाश हो ही नहीं सक ता। भोग-मार्ग की ओर बहती हुई प्रवृत्तियों को परमात्मा के मार्ग की ओर मोढ़ दो, वासनाओं का स्वत: विनाश हो जायेगा। वासना का विनाश होने पर ब्रहा्रभाव जागता है। यदि मन में किञ्चित् भी वासना होगी, तो परमात्मा-मिलन नहीं हो सकेगा। गजेन्द्र मोक्ष कैसे हुआ?
इसका पं्रसग ध्यान से सुनिए, यह कथा जीव मात्र की कथा है। संसार के विषयों में आसक्त हुए जीव को काल का भी मान भान नहीं रहता और विषयों में डूबा प्राणी यह भी भूल जाता है कि एक दिन उसे काल का ग्रास बनना है। यह संसार ही सरोवर है, जीव गजेन्द्र और काल मगरमच्छ है। मनुष्य कहता है मैं काम सुख का उपभोग करता हूँ, परन्तु यह सत्य नहीं काम ही मनुष्य का उपभोग करके क्षीण बनाता है। अर्थात् भोग पूर्ण नहीं होंगे, एक दिन हम ही पूर्ण हो जायेंगे अर्थात् इस संसार से चले जायेंगे।