धर्म

सत्यार्थप्रकाश के अंश—39

जीवन आधार पत्रिका यानि एक जगह सभी जानकारी..व्यक्तिगत विकास के साथ—साथ पारिवारिक सुरक्षा गारंटी और मासिक आमदनी भी..अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करे।

जीवन आधार जनवरी माह की प्रतियोगिता में भाग ले…विद्यार्थी और स्कूल दोनों जीत सकते है हर माह नकद उपहार के साथ—साथ अन्य कई आकर्षक उपहार..अधिक जानकारी के लिए यहां क्ल्कि करे।

नौकरी की तलाश है..तो जीवन आधार बिजनेस प्रबंधक बने और 3300 रुपए से लेकर 70 हजार 900 रुपए मासिक की नौकरी पाए..अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करे।

पत्रकारिकता के क्षेत्र में है तो जीवन आधार न्यूज पोर्टल के साथ जुड़े और 72 हजार रुपए से लेकर 3 लाख रुपए वार्षिक पैकेज के साथ अन्य बेहतरीन स्कीम का लाभ उठाए..अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करे।

सूर्य आकार वाला,जल कूण्डे भी आकार वाले हैं। सूर्य जलकूण्डे से भिन्न और सूर्य से जल कूण्डे भिन्न है तभी प्रतिबिम्ब पड़ता है। यदि निराकार होते तो उन का प्रतिबिम्ब कभी न होता। और जैसे परमेश्वर निराकार,सर्वत्र आकाशवत् व्यापक होने से ब्रह्म से कोई पदार्थ वा पदार्थो से ब्रह्म पृथक नहीं हो सकता और व्याप्यव्यापक भाव सम्बन्ध कभी नहीं घट सकता। सो बृहदारण्दक के अन्तयार्मी ब्रह्मण में स्पष्ट लिखा है और ब्रह्म का आभास भी नहीं पड़ सकता क्योंकि बिना आकार के आभास का होना असम्भव है। जो अन्त:करण चलायमान,खण्ड-खण्ड और ब्रह्म अचल अखण्ड है। यदि तुम ब्रह्म और जीव का पृथक-पृथक न मानोगे तो इसका उत्तर दिजिये कि जहां-जहां अन्तकरण चला जायेगा वहां वहां के ब्रह्म केा अज्ञानी और जिस-जिस देश को छोड़ेगा वहां-वहां के ब्रह्म को ज्ञानी कर देवेगा वा नहीं? जैसे छाता प्रकाश के बीच में जहां -जहां जाता है वहां -वहां के प्रकाश को आवरणयुक्त और जहां-जहां से हटाता है वहां-वहां के प्रकाश को आवरणहित कर देता है। वैसे ही अन्त:करण ब्रह्म को क्षण-क्षण में ज्ञानी,अज्ञानी ,बुद्ध और मुक्त कराता जायेगा। अखण्ड ब्रह्म के एक देश में आवरणरहित कर देता है। वैसे ही अन्त:करण ब्रह्म क्षण-क्षण में ज्ञानी-अज्ञानी ,बुद्ध और मुक्त कराता जायगा। अखण्ड ब्रह्म के एक देश में आवरण का प्रभाव सर्वदश में होने से सब ब्रह्म के एक देश में आवरण का प्रभाव सर्वदेश में होने से सब ब्रह्म अज्ञानी हो जायेगा क्योंकि वह चेतन है। और मथुरा में जिस अन्त:करणस्थ ब्रह्म अज्ञानी हो जाएगा क्योंकि चेतन है। और मथुरा में जिस अन्तकरणणस्थ ब्रह्म ने जो वस्तु देखी उसका स्मरण उसी अन्तकरणस्थ से काशी में नहीं हो सकता। क्योंकि अन्यदृष्टमन्यो न स्मरतीति न्यायात् और के देखे का स्मरण और को नहीं होता। जिस चिदाभास ने मथुरा में देखा वह चिदभास काशी में नहीं रहता किन्तु जो मथुरास्थ अन्तकरण का प्रकाशक है वह काशीस्थ ब्रह्म नहीं होता। जो ब्रह्म जीव है,पृथक नहीं तो जीव का सर्वज्ञ होना चाहिये। यदि ब्रह्म का प्रतिबिम्ब पृथक है तो पूर्व दृष्ट,श्रतु का ज्ञान किसी को नहीं हो सकेगा। जो कहो कि ब्रह्मा एक है इसलिये स्मरण होता है तो एक ठिकाने अज्ञान वा दु:ख हो जाना चाहिये,और ऐसे-ऐसे दृष्टान्तों से नित्य,शुद्ध,बुद्ध,मुक्तस्वभाव ब्रह्म को तुमने अशुद्ध अज्ञानी और बुद्ध आदि दोषयुक्त कर दिया है और अखण्ड को खण्ड-खण्ड कर दिया।
जीवन आधार बिजनेस सुपर धमाका…बिना लागत के 15 लाख 82 हजार रुपए का बिजनेस करने का मौका….जानने के लिए यहां क्लिक करे

Related posts

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—359

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से —655

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से- 211