हिसार,
हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष दलबीर किरमारा ने विभिन्न दुर्घटनाएं होने पर रोडवेज चालकों पर केस दर्ज किये जाने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के परिवहन बेड़े में बसों की भारी कमी है, जिस वजह से बसें ओवरलोड होती है और कोई न कोई छात्र या अन्य यात्री दुर्घटना का शिकार हो जाता है जिस पर उस बस के चालक पर केस दर्ज कर लिया जाता है जो गलत है।
एक बयान में दलबीर किरमारा ने गत दिवस जिले के नंगथला गांव में हुई दुर्घटना में मारे गये छात्र के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और सरकार से मांग की कि पीडि़त परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। हालांकि कोई भी मुआवजा किसी पारिवारिक सदस्य की भरपाई नहीं कर सकता लेकिन उसके परिवार को काफी हद तक आर्थिक सहायता मिल सकती है। उन्होंने संगठन की तरफ से पीडि़त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मृतक छात्र की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा ऐसी दुर्घटनाओं के लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेवार है। छात्र वर्ग की मजबूरी है कि उन्हें पढ़ाई के लिए निर्धारित स्थानों पर आना पड़ता है लेकिन परिवहन बेड़े में बसों की भारी कमी के चलते बसों की छत पर या खिड़कियों में लटककर यात्रा करनी पड़ती है। ऐसी हालत में कोई न कोई दुर्घटना हो जाती है और फिर उस दुर्घटना के आरोप में बस चालक पर केस दर्ज करवा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि रोडवेज चालकों पर इस तरह दर्ज किये जा रहे मामले बिल्कुल सही नहीं है और इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करके उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत करवाया जाएगा।
दलबीर किरमारा ने कहा कि बसों की भारी कमी को दूर करने की मांग हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ लगातार उठाता रहा है, मुख्यमंत्री, मंत्री व विभाग के उच्चाधिकारी पिछले कई वर्षों से बसें बढ़ाने का आश्वासन देते रहे हैं लेकिन वे अपने आश्वासन पर अमल करने का बिल्कुल प्रयास नहीं करते, जिसका खामियाजा प्रदेश की ग्रामीण जनता व छात्र वर्ग को बसों की कमी के रूप में तथा रोडवेज चालकों को दुर्घटना के केस के रूप में भुगतना पड़ रहा हैं। उन्होंने कहा कि बसों के ओवरलोड होने पर यदि चालक छात्रों व अन्य यात्रियों को नीचे उतारने का प्रयास करते हैं तो उनसे मारपीट की जाती है और यदि वे ओवरलोड बस लेकर चलते हैं तो ऐसी दुर्घटनाएं हो जाती है। ऐसी हालत में रोडवेज चालक मानसिक तनाव के बीच नौकरी करने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि पुलिस को चाहिए कि वह दुर्घटना होने का इंतजार करने की बजाय ओवरलोड बसों को पहले ही रोकें और दिल्ली की तर्ज पर रोडवेज बसों का चालान काटें, जिनका भुगतान सरकार करें ताकि सरकार को भी पता चल सकें कि सच्चाई क्या है।