धर्म

परमहंस स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—28

बहुत समय पहले की बात है। एक बहुत बड़ा और घना जंगल हुआ करता था। गर्मियों के दिन थे जंगल में जानवरों की पहल कदमी हो रही थी। अचानक ही आग से जलती अंगारी जंगल में जा गिरी और जंगल में भयानक आग लग गई। जंगल के सभी जानवर अपनी जान बचाने के लिए इधर–उधर भागने लगे।

आग के कारण पूरे जंगल में भगदड़ मच गई। उस जंगल में पेड़ पर एक नन्ना परिंदा रहा करता था। जब उसने देखा के पूरे जंगल में आग लग गई है और जंगल के सभी जानवरों और लोगों को आग से भयभीत होकर दौड़ते हुए देखा तो उस नन्ने परिंदे ने उन सब की मदद करने का निश्चय किया।

मदद के इरादे से वो जल्दी ही पास की एक नदी में गया और उसने अपनी चोच में पानी भर लिया और जंगल की आग में ड़ालने लगा। वो बार–बार नदी में जाता और अपनी चोंच में पानी भरता। जंगल में आकर आग में डाल देता। नदी के पास एक पेड़ पर बैठा एक कौवा यह सब कुछ देख रहा था और उसने पास से गुजरते परिंदे को बोला तुम कितने मूर्ख हो इतनी भयानक आग को चोंच में पानी भरकर कैसे बुझाया जा सकता है। तुम इस आग को कभी नहीं बुझा सकते।

यह सुनते ही उस नन्ने परिंदे ने बड़ी ही निम्रता से उतर दिया, मुझे यह पता है के मेरी इस कोशिश से कुछ भी नहीं होने वाला है परन्तु में अपनी तरफ़ से हर संभव कोशिश करना चाहता हूं। आग कितनी भी ज्यादा हो पर में अपनी कोशिश करना नहीं छोडूंगा। कौवा उस नन्ने परिंदे की बात से बहुत प्रभावित हुआ। इसके बाद एक—एक करके सभी जानवर इस कोशिश में साथ देने लगे और उन्होंने मिलकर आग पर काबू पा लिया।

प्रेमी सुंदरसाथ जी, कितनी भी बड़ी विपदा आ जाए, उससे भागना मत, बल्कि उसका डटकर मुकाबला करना। जीत आपकी होगी।

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