हिसार

रोडवेज विभाग को खत्म करने के प्रयास कर रही है सरकार: समिति

हिसार,
विभागीय मांगों को लेकर रोडवेज कर्मचारियों द्वारा प्रत्येक डिपो में संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 24 घण्टे की भूख हड़ताल के बाद भूख हड़ताल पर बैठे कर्मचारियो को कर्मचारी नेता एमएल सहगल, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान राजबीर बैनीवाल, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान सुरेन्द्र मान, देशराज वर्मा, बैंक यूनियन के कर्मचारी नेता वीएल शर्मा व अजमेर सावंत ने जूस पिला कर अनशन खुलवाया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार दमन के रास्ते पर चलकर कर्मचारी आन्दोलनों को नहीं रोक पाएगी किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से ही किया जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि कर्मचारियो को हड़ताल प्रदर्शन व भूख हड़ताल करने का कोई शौक नहीं है और ना ही रोडवेज के कर्मचारी अपने वेतनमान व भत्तों में बढ़ोतरी के लिए आन्दोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि प्रदेश की जनसंख्या के हिसाब से रोडवेज बेड़े में बसों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे प्रदेश के हर नागरिक को सुरक्षित व सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध मिल सके, परन्तु सरकार इस कमाऊ विभाग को निजी हाथों में सौंपकर इसका निजीकरण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि बहुत लम्बे समय से लगभग सभी हरियाणा प्रदेश की सरकारों व पूंजीपतियों की नजरें रोडवेज विभाग पर लगी हुई हैं और समय समय पर सरकारों द्वारा गलत तर्क जैसे रोड़वेज का घाटा कभी लोगों को पर्याप्त बस सेवा उपलब्ध करवाने के नाम पर जनता के पैसे से आम जनता की सेवा कर रहे विभाग को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसा विभाग जो समाज के भिन्न भिन्न वर्गो को मुफ्त व निशुल्क सेवा उपलब्ध करवा रहा हो और एक ऐसा विभाग जो सरकार के खजाने में हर माह 14,73,74,640 रूपये यात्री कर के रूप में सरकारी खजाने में जमा करवाता हो और जिस विभाग के कर्मचारियों ने हरियाणा गठन के बाद सभी सुविधाओं से युक्त लगभग 100 बस अडडों का निर्माण किया है और 40 आधुनिक सुविधाओं से युक्त वर्कशाप का निर्माण किया है और दो वर्ष तक बगैर किराया बढ़ोतरी के निरंतर बढते डीजल की कीमतों के बावजूद हजारों नवयुवकों को रोजगार प्रदान कर समाज निर्माण का कार्य किया हो ऐसे विभाग को खुले तौर पर घाटा वाला विभाग बताकर निजीकरण की ओर धकेलना आम जनता के अधिकारों पर कठुराघात है। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि इस निजीकरण के पीछे कर्मचारी युनियनों के आपसी मतभेद भी सरकार को ऐसा कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, यदि इस समय पर सभी युनियनों के नेताओं ने अपनी शान को रोडवेज से ऊपर समझ कर संघर्ष से भागने का काम किया तो रोडवेज के कर्मचारी व जनता ऐसे चेहरों को माफ नहीं करेगी ।
निजी बसों के संचालन के लिए भिन्न भिन्न डिपुओ में भिन्न भिन्न दरों पर निजी बसों को किलोमिटर स्कीम के तहत छुट देना किसी बड़े घोटाले के संकेत दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि निजी बसों को परमिट देकर चलाने के फैसले की किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच करवाई जाए। वहीं रोडवेज कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान राजपाल नैन ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि सरकार बातचीत के माध्यम से कर्मचारियों की मांगों का समाधान किया जाए और विभाग के निजीकरण के प्रयासों को बंद कर रोडवेज के बेड़े में बढ़ोतरी की जाए, ताकि आम जनता को सुरक्षित व सस्ती परिवहन सुविधा मिल सके और प्रदेश के शिक्षित युवाओं को रोजगार मिल सके।

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Jeewan Aadhar Editor Desk