हिसार,
कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कहा है कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही अधिकारियों, कर्मचारियों व जनता पर विश्वास ना करके राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं के सहारे प्रशासन चलाने का प्रयास किया गया। इसी वजह से अधिकारियों व कर्मचारियों में रोष है और धरने, प्रदर्शन, जुलूस, हड़ताल आम बात हो गई है।
प्रो. संपत सिंह नलवा हलके के दौरे के दौरान रावतखेड़ा में ग्रामीणों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ग्रामीणों को 25 नवम्बर को बरवाला में होने वाली पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की जनक्रांति यात्रा में पहुंचने का न्यौता भी दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने दफ्तर व आवास पर निजी सहायक व सलाहकार के रूप में भी इन्हीं संघ के लोगों को लगा रखा है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपति व चयन आयोग की जिम्मेवारी भी लगभग इन्हीं संघी लोगों को दे रखी है, जिसकी वजह से सभी नई नियुक्तियां प्रभावित हो रही है और बेरोजगार उम्मीदवार सड़कों पर भटक रहे है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मंत्री, जिलाधीश व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों पर निगरानी रखने के लिए भी नागपुर से संघ के लोग मुख्यमंत्री सुशासक सहायक लगा रखे है, जिसकी वजह से मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों में असंतोष फैला हुआ है। उन्होंने मांग की कि जनता व जनता के खजाने को संघ की लूट से बचाने के लिए ऐसे सभी लोगों को तुरंत हटाया जायें।
प्रो. संपत सिंह ने कहा कि सरकार की नाकामी के चलते इस बार की रोडवेज की हड़ताल 18 दिनों की सबसे लंबी हड़ताल रही, लाखों लोग परेशान हुए और करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में प्रदेश में विकास के काम पटरी से उतर चुके है, हर जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है और हर तरफ अफरा-तफरी मची हुई है। समाज के सभी वर्गों में असंतोष फैला हुआ है। प्रदेश में जघन्य अपराध बढ़ते जा रहे है। इसी कारण मुख्यमंत्री की घोषणाएं भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। छह महीने पहले हिसार में मुख्यमंत्री ने चौकीदारों का सम्मेलन बुलाकर उनका मानदेय 3500 रुपये प्रतिमाह से 7000 रुपये प्रतिमाह की घोषणा की थी परंतु अभी तक बढ़ी हुई राशि उन्हें नहीं मिली है। ये गरीब लोग रोजाना दफतरों के चक्कर काटकर थक चुके है। यही हाल फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषणाओं का है। फसलों की खरीद के लिये अनेक शर्तें लगाकर किसान को दुखी कर दिया गया है।
इस अवसर पर सुनील सरपंच, उमेद राजपूत पूर्व सरपंच, जसवंत सरपंच, विनोद सरपंच, शुभराम गुलिया, बलराज टोकस, सूबेदार काशीराम, भूप नंबरदार, हेतराम बिश्नोई, भट्ट सुरेन्द्र बूरा, भीमसिंह भोजराज, जयबीर बैनीवाल, गोपाल नंबरदार, वजीर दलाल, अजीत गढ़वाल, संजय गेट, वेदपाल सिंधड, सतबीर बैनवाल, धर्मपाल, गोलू गुर्जर, कुलदीप, संजय प्रधान, शमशेर रावलवास, मनोज पंघाल, जगबीर पनिहार, संदीप धीरणवास, जुगनु, अनिल, जयभगवान, मनोज, रामसिंह देहडु, सतबीर सिवाच आदि उपस्थित थे।