हिसार,
अक्सर चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के जमानत जब्त होने की खबरें आती हैं। जानते हैं आखिर यह जमानत राशि क्या होती है, कितनी राशि होती है और यह कब जब्त होती है।
देश में लोकसभा चुनाव 2019 की मतगणना चल रही है। देशभर में भाजपा के प्रति लोगों में जोश देखने को मिल रहा है। हरियाणा में भाजपा सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज करने की राह पर है। रोहतक को छोड़कर शेष 9 सीटों पर कांग्रेस का कोई प्रत्याशी भाजपा उम्मीदवारों को टक्कर नहीं दे पाया। ऐसे में कुछ पर तो जमानत बचाने की नौबत तक आ गई।
क्या है जमानत राशि?
किसी भी चुनाव में जब प्रत्याशी चुनाव लड़ता है तो पर्चा भरते वक्त उसे एक निश्चित रकम जमानत के तौर पर चुनाव आयोग में जमा करनी होती है। इसी राशि को चुनावी जमानत राशि कहते हैं। यह राशि कुछ मामलों में वापस दे दी जाती है अन्यथा आयोग इसे अपने पास रख लेता है।
कितनी होती है जमानत राशि?
जमानत राशि हर चुनाव के आधार पर तय की जाती है और चुनाव के आधार पर अलग अलग होती है। पंचायत के चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक जमानत राशि अलग अलग होती है। यह राशि सामान्य वर्ग के लिए और आरक्षित वर्ग के लिए अलग अलग होती है। एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को जनरल वर्ग के उम्मीदवारों के मुकाबले आदि राशि देनी होती है।
लोकसभा चुनाव के लिए जमानत राशि
लोकसभा चुनाव में दावेदारी प्रस्तुत करने जा रहे जनरल वर्ग के उम्मीदवारों को 25 हजार रुपये और एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 12,500 रुपये फीस जमा करनी होती है। 2009 से पहले जनरल वर्ग के लिए यह राशि 10 हजार रुपये और एससी-एसटी उम्मीदवार के लिए 5 हजार रुपये थी।
कब जब्त होती है जमानत?
जब कोई प्रत्याशी किसी भी चुनाव क्षेत्र में पड़े कुल वैध वोट का छठा हिस्सा हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी जमानत राशि जब्त मानी जाती है और नामांकन के दौरान दी गई राशि उन्हें वापस नहीं मिलती है। जैसे अगर किसी सीट पर 1 लाख लोगों ने वोट दिया है और उम्मीदवार को 16666 से कम वोट हासिल हुए हैं तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी।
किसे वापस मिलती है जमानत राशि?
– जब किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो जाता है या वह अपनी उम्मीदवार वापस ले लेता है तो यह राशि लौटा दी जाती है।
– किसी उम्मीदवार की वोटिंग शुरू होने से पहले मौत हो जाती है तो यह राशि परिवारजन को वापस मिल जाती है।
– अगर उम्मीदवार कुल डाले गए वोट के छठे हिस्सा से ज्यादा वोट हासिल कर लेता है।
– अगर कोई उम्मीदवार छठे हिस्से जितना वोट हासिल नहीं कर पाता है और चुनाव जीत जाता है तो उन्हें भी राशि दे दी जाती है।
कहा जाता हैं पैसा?
प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त होने पर जमा होने वाले पैसों को इलेक्शन अकाउंट में जमा किया जाता है।