हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करता है सुरक्षा चक्र का काम : सोनू भाई
हिसार,
‘लहर-लहर लहराए रे झंडा बजरंग बली का, जय बजरंग बली की बोलो’, ‘बजरंग बली मेरी नाव चली जरा बल्ली कृपा की लगा देना’, ‘हे पंचमुखी बालाजी महाराज ज्योत से संकट काटो जी’, ‘बजरंग बली की जय श्री पंचमुखी महाराज की जय’ आदि के जयकारों की गूंज से शहर के मुख्य मार्गों का वातावरण भक्तिमय हो गया जब बाबा बजंरग बली हनुमान जी के भगतों की अगुवाई में श्रद्धालुओं का एक जत्था नागोरी गेट स्थित हनुमान मंदिर से बाबा की ध्वज यात्रा के साथ चौधरीवास बालाजी धाम के लिए रवाना हुआ। पैदल ध्वजयात्रा से पूर्व चौधरीवास धाम के मोनू भाई के सानिध्य में मंदिर के पुजारी विद्वान ब्राह्मण ने बाबा की विधिवत आराधना करके मंत्रों कि उच्चारण के साथ ध्वज यात्रा को रवाना करने की अनुमति दी। ध्वज यात्रा को धाम के परमश्रद्धेय सोनू भाई जी व मोनू भाई जी ने झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस मौके पर सोनू भाई ने कहा कि अगर हम संकट मोचन हनुमान जी के अधीन होकर प्रतिदिन हनुमान चालीसा के पाठ का श्रवण करेंगे तो वह हमारे लिए सुरक्षा चक्र का काम करेगी। इसलिए हमें नित्यप्रति मन से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। संकट मोचन ऐसे कृपालु हैं, अपने भगतों के संकट चुटकियों में काटते हैं, हमें तो सच्चे मन से उन की आराधना करनी है। ध्वज यात्रा का शहर के कई स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया व प्रसाद वितरण किया गया। यह ध्वज यात्रा सायं चौधरीवास धाम में पहुंच कर भव्य जागरण में शिरकत करेगी। इस मौके पर विजय यादव, नरेश, गोपाल डालमिया, संजय डालमिया, नवीन बिश्नोई, सरोज, निशा, पूजा, जगदीश, विद्या, सुभाष, शीला, कुलदीप, रामू सिरसा, सुनील सिरसा, कपिल, सुभाष, विक्रम, व संजय सहित अनेक भक्तजन उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि श्री पंचमुखी बालाजी धाम, चौधरीवास, हिसार की महिमा हिसार और हरियाणा में ही नहीं अपितु पूरे देश भर में विख्यात है। यहां पर देश और विदेशों से सैकड़ों भक्त बाबा के दर्शन हेतु मेले पर पहुंचते हैं व सवा पांच रुपये की दरख्वास्त अर्जी लगाने से सभी संकट दूर होते हैं व मनोकामना पूरी होती है, ऐसी भक्तों की मान्यता व विश्वास है। यहां श्री बालाजी महाराज स्वयं विराजमान रहकर भक्तों पर अपनी कृपा बनाये रखते हैं व दैहिक, दैविक, भौतिक आदि तापों का निवारण मात्र 5.25 रुपये की अर्जी से करते हैं। मंदिर ट्रस्ट द्वारा पूरे साल भर भंडारा चलता है व आए हुए यात्रियों की ठहरने की व्यवस्था भी की जाती है। पूरे वर्ष भर में लगने वाले पांच मेलों में से यह शरद पूर्णिमा का मेला विशेष महत्व रखता है।