हिसार

धान अवशेषों की गांठ बनाने वाले किसानों को मिलेंगे 50 रुपये प्रति क्विंटल : डीसी

प्रोत्साहन राशि के लिये करवाना होगा रजिस्ट्रेशन, पोर्टल को मेरी फसल—मेरा ब्यौरा से भी किया लिंक

हिसार,
कृषि निदेशालय निर्देशानुसार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा धान अवशेषों की बेलर से गांठ (बेल) बनवाने वाले किसानों को सरकार द्वारा 50 रुपये प्रति क्विंटल (या 1000 रुपये प्रति एकड़) के हिसाब से प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। इस स्कीम के अन्तर्गत किसान को विभागीय पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएग्रीहरियाणासीआरएमडॉटकॉम एवं डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएग्रीहरियाणाडॉटजीओवीडॉटइन पर रजिस्टर करवाना होगा। पोर्टल को मेरी फसल-मेरा ब्यौरा सर्वर से भी लिंक किया गया है।
उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने स्कीम की जानकारी देते हुए बताया कि पराली की गांठ/बेल के निष्पादन के लिए लिंक पर क्लिक करके अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान भाई मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पर पंजीकृत नहीं है, तो वह उप कृषि निदेशक के कार्यालय में लिखित आवेदन के उपरांत रजिस्टर करवा सकते हैं। पंजीकरण उपरान्त ऑटो जनरेट आवेदन पर गांव स्तर की कमेटी द्वारा बेल बनाने वाले क्षेत्रफल का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। किसान ने गांठ को पंचायत की जमीन पर स्टॉक किया है तो संबंधित पंचायत का प्रमाण-पत्र और यदि गांठ को बेचा है तो सेल बिल प्रस्तुत करना होगा। गांव स्तर की कमेटी द्वारा वैरीफाई बाद जिला स्तरीय कमेटी (डीएलईसी) द्वारा स्वीकृति उपरांत सहायक कृषि अभियन्ता द्वारा किसानों के खातों में प्रोत्साहन राशि डाली जाएगी।
उपायुक्त ने बताया कि अभी तक जिले में कुल 23 किसानों ने अपना पंजीकरण किया है। इन किसानों की गांठ के क्षेत्रफल का कार्य जल्दी ही गांव स्तर की कमेटी द्वारा वैरिफाई करवाया जाएगा। इसके अलावा अन्य किसी किसान ने गांठ बनाई है तो वह पोर्टल अपना पर पंजीकरण करवा सकता है ताकि भौतिक सत्यापन उपरान्त प्रोत्साहन राशि का लाभ ले सके। किसान गांठों को पंचायत जमीन पर स्टोर करवा सकते हैं या बेचकर संबंधित से बिल की प्रति प्राप्त कर सकता है ताकि स्कीम का लाभ प्राप्त हो सके।
सहायक कृषि अभियंता गोपीराम ने बताया कि पराली में आग पर रोक लगाने के लिए सरकार ने पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वह पराली स्टोर करने के लिए स्थान उपलब्ध करवाएं। इस स्थान पर पराली को स्टोर कर किसान को रसीद उपलब्ध करवाएं। इस रसीद को लेकर किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर अपडेट करेगा। इसके बाद समिति की ओर से पास करने पर किसान के खाते में 50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रोत्साहन राशि भेज दी जाएगी। इस योजना के बाद पराली की बिक्री न होने की समस्या झेल रहे किसानों की समस्या हल होगी।

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