धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से-217

एक बार नारद मुनि ने कामदेव को पराजित कर था। नारद जी को इस बात से घमंड हो गया। वे सभी से बोल रहे थे कि मैंने कामदेव को हरा दिया है। वे खुद ही अपनी प्रशंसा कर रहे थे। उत्साह में वे कैलाश पर्वत शिव जी के भी पहुंच गए।
शिव जी ने भी कामदेव को भस्म कर दिया था, लेकिन उन्होंने क्रोध किया था। नारद मुनि शिव जी से कहते हैं कि मैंने तो क्रोध नहीं किया, फिर भी कामदेव को पराजित कर दिया है।
शिव जी समझ गए कि नारद मुनि भक्त हैं और इन्हें घमंड हो गया। शिव जी बोले कि कि आपने कामदेव को पराजित कर दिया है, ये ठीक है, लेकिन आपको इस बात का घमंड नहीं करना चाहिए। आप मुझसे तो ये बात कह रहे हैं, लेकिन विष्णु जी से मत कहना।
शिव जी की ये सलाह सुनकर नारद जी को लगा कि शिव जी को मेरी प्रशंसा अच्छी नहीं लग रही है। इसीलिए मुझे ऐसा कह रहे हैं। शिव जी के मना करने के बाद भी नारद मुनि विष्णु जी के पास पहुंच गए।
विष्णु जी नारद मुनि की बातें सुनकर समझ गए कि मेरा भक्त अहंकारी हो गया है, इनका घमंड दूर करना होगा। इसके बाद विष्णु जी ने अपनी माया से एक नगरी बनाई, जहां एक राजकुमारी का स्वयंवर हो रहा था।
नारद मुनि भी उस नगरी में पहुंच गए और राजकुमारी को देखकर उस पर मोहित हो गए। नारद उस राजकुमारी से विवाह करना चाहते थे। वे तुरंत ही विष्णु जी के पास पहुंच गए। नारद जी ने भगवान से कहा कि आप मुझे सुंदर रूप दे दीजिए, जिसे देखकर वह राजकुमारी स्वयंवर में मुझे चुन ले।
विष्णु जी ने नारद मुनि को बंदर का मुंह दे दिया। इसी रूप में नारद स्वयंवर में पहुंच गए। वहां नारद मुनि का अपमान हुआ। इससे क्रोधित होकर नारद मुनि ने विष्णु जी को शाप भी दे दिया। बाद में जब नारद का गुस्सा शांत हुआ और उन्हें पूरी बात समझ आई, तब उनका अहंकार खत्म हो गया और उन्होंने विष्णु जी से क्षमा मांगी।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, कथा में शिव जी ने नारद मुनि से जो बातें कही थीं, वह हमारे बहुत काम की हैं। शिव जी ने नारद से कहा था कि आपको घमंड नहीं करना चाहिए। शिव जी स्वयं नारद मुनि को सही सलाह दे रहे थे, लेकिन नारद ने अहंकार की वजह से उस सलाह पर ध्यान नहीं दिया और फिर विष्णु जी ने उनका अहंकार दूर किया। हम अगर कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के सही सलाह दे रहा है तो हमें उसकी बात मान लेनी चाहिए और अहंकार नहीं करना चाहिए।

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