धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—313

पुराने समय में एक गांव में एक अंधा व्यक्ति रहता था। वह अकेले रहता था। गांव के लोगों से खाने को मिलता, उसी से उसका जीवन चल रहा था। बिना वजह से किसी के काम में दखल नहीं देता था। अंधे व्यक्ति की एक खास बात थी, वह रात में जब भी घर से बाहर निकलता तो अपने साथ जलती हुई एक लालटेन जरूर रखता था। गांव के लोगों को ये बात बहुत अजीब लगती थी। लेकिन, उससे कोई कुछ कहता नहीं था।

एक बार गांव के कुछ शरारती लड़कों ने अंधे व्यक्ति को लालटेन के साथ देखा तो वे उसका मजाक उड़ाने लगे। लड़कों ने कहा कि तुम तो अंधे हो, तुम कुछ दिखाई ही नहीं देता है तो ये लालटेन क्यों रखते हो अपने साथ?

अंधे व्यक्ति ने कहा कि तुम सभी सही बोल रहे हो। मेरे लिए लालटेन का कोई उपयोग नहीं है। मेरा जीवन तो वैसे ही अंधकार में चल रहा है। दिन हो या रात, मेरे लिए तो सभी समान है। मुझे तो अंधेरे में रहने की आदत है। लेकिन, मैं ये लालटेन उन लोगों के लिए साथ में रखता हूं जो देख सकते हैं और जिन्हें अंधेरे में रहने की आदत नहीं है। रात में अंधेरे की वजह से अगर कोई मुझे न देख सके तो मुझे धक्का लग सकता है, टक्कर की वजह से चोट सकती है। दूसरों को मैं दिखाई दूं, इसलिए रात में लालटेन लेकर घर से निकलता हूं। ताकि दुर्घटना की संभावना न रहे।

ये बातें सुनकर सभी लड़के शर्मिंदा हो गए। लड़कों ने एक सही व्यक्ति को गलत समझ लिया और उसका मजाक उड़ाया। उन्हें अपनी गलत सोच पर शर्म आ रही थी।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, हमें किसी भी व्यक्ति के बारे में पहले से ही कोई धारणा नहीं बनानी चाहिए। जब तक पूरी बात मालूम न हो, किसी नतीजे पर न पहुंचे। वरना, अधूरे ज्ञान की वजह से दूसरों के लिए हमारी गलत सोच बन सकती है।

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