हिसार

रक्षाबंधन के दिन रोडवेज अधिकारियों व कर्मचारियों ने तन्मयता से निभाई ड्यूूटी : दलबीर किरमारा

प्रदेशभर में महिलाओं व उनके बच्चों को नहीं होने दी परेशानी, निष्ठा से किया काम

हिसार,
हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दलबीर किरमारा ने राज्य सरकार द्वारा रक्षाबंधन पर महिलाओं व 15 साल तक के बच्चों को दी गई निशुल्क यात्रा की छूट के तहत राज्यभर में सरकार के इस अभियान को सफल बनाने में रोडवेज अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि पहले दिन 12 बजे से रोडवेज अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी निष्ठापूर्वक व मेहनत से की, जिसके चलते महिलाओं व बच्चों को कोई परेशानी नहीं हुई। हिसार डिपो में पूरे स्टाफ ने जिस तन्मयता से ड्यूटी की, वह काबिलेतारीफ है।
दलबीर किरमारा ने कहा कि राज्य सरकार ने रक्षाबंधन पर महिलाओं व उनके 15 साल तक के बच्चों को निशुुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी। सरकार की इस घोषणा को प्रदेशभर के विभिन्न डिपुओं में कर्मचारियों ने कड़ी मेहनत से सिरे चढ़ाया। रोडवेज कर्मचारी पूरे तालमेल से विभिन्न डिपुओं में डटे रहे और महिलाओं व बच्चों को विभिन्न रूटों पर जाने वाली बसों में बैठाकर उनके गंतव्य तक पहुंचाया। हिसार डिपो में महाप्रबंधक के नेतृत्व में संस्थान प्रबंधक, डीआई व डीआई कार्यालय का स्टाफ लगातार ड्यूटी पर और विभिन्न रूटों पर विभाग की बसों को नियमित रूप से संचालित करवाया ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। उन्होंने रोडवेज अधिकारियों व कर्मचारियों के तालमेल की प्रशंसा करते हुए कहा कि कोई भी अभियान एकजुटता व तालमेल से ही सफल होता है।
दलबीर किरमारा ने कहा कि राज्य सरकार पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा की घोषणा करती आ रही है। यदि सरकार महिलाओं या किसी अन्य वर्ग की सुविधा के लिए घोषणा करती है तो रोडवेज कर्मचारियों को कोई आपत्ति नहीं है लेकिन इस दौरान एक बात अवश्य खलती है कि रोडवेज बेड़े में बसों की भारी कमी है। सरकार को चाहिए कि वह बढ़ती जनसंख्या के अनुपात के अनुसार रोडवेज बेड़े में बसों की संख्या बढ़ाकर 10 से 12 हजार करें ताकि इस तरह की घोषणाओं को सिरे चढ़ाने में कोई दिक्कत न आए। इसके साथ ही विभाग में खाली पड़े हजारों पदों पर स्थाई भर्ती की जाए ताकि बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार केवल किसी अभियान की घोषणा करती है और उसे सिरे चढ़ाने की जिम्मेवारी कर्मचारी वर्ग के कंधों पर होती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह कर्मचारियों की भावना का सम्मान करते हुए उनकी मांगों व समस्याओं का समाधान करें और जनता की जरूरत को देखते हुए परिवहन बेड़े में बसों की संख्या बढ़ाएं।

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