हांसी,
एक साल से अधिक समय से सामाजिक बहिष्कार की मार झेल रहे भाटला के दलितों ने
आखिरकार आज गांव के गुरु रविदास मंदिर में बौद्ध भंतो की मौजूदगी में विधिवत बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। कार्यक्रम में नैशनल अलायन्स फ़ॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक एडवोकेट रजत कल्सन ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की तथा जाने-माने दलित एक्टिविस्ट दिनेश खापड़ ने समारोह की अध्यक्षता की। इस मौके पर श्रवण थुराना ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की।
गांव भाटला के गुरु रविदास मंदिर में यमुनानगर व बल्लभगढ़ से आए बौद्ध संतो ने विधिवत तरीके से भाटला गांव के दलितों को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी। इससे पहले रविदास मदिर में आए बौद्ध भंतो,जिनमें भंते धर्म सागर, भंते आनंद सागर व भंते निर्भय सागर ने मौके पर मौजूद दलित समाज के लोगों को बौद्ध धर्म के मुख्य सिद्धांत अहिंसा व शांति के बारे में बताया।
पंचशील का सिद्धांत सुनने के बाद मौके पर मौजूद 300 दलित ग्रामीणों ने भगवान बुद्ध व डॉक्टर बीआर अंबेडकर की तस्वीरों के सामने शीश नवाते हुए बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। इस अवसर पर गांव के गुरु रविदास मंदिर में आए हुए बौद्ध भँतो ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण वालों के नाम सूचीबद्ध किए जिन्हें जल्दी ही बौद्ध धर्म दीक्षा ग्रहण से संबंधित प्रमाण पत्र भी
दिए जाएंगे। समारोह में आए लोगों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि रजत कल्सन ने कहा कि मौजूदा सरकार में दलितों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जा रहा है व उनका उत्पीड़न
किया जा रहा है। सरकार ने पुलिस विभाग में इस तरह के दलित विरोधी पुलिस अधिकारियों की भर्ती की है जो दलितों का उत्पीड़न करवाने वालों को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार व पुलिस के दलित विरोधी रवैये के चलते ही भाटला में दो समुदायों के बीच इतनी बड़ी समस्या पैदा हो गई है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार नफरत के सहारे अपनी राजनीतिक चला रही है। इसी राजनीति के चलते हुए हरियाणा को तीन बार आग के हवाले कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय मे अन्य जिलों में भी सरकार की दलित विरोधी मानसिकता के चलते इस तरह के बौद्ध धर्म ग्रहण कार्यक्रम के आयोजन किये जायेंगे। लोगो को भविष्य में बीजेपी को वोट न करने की शपथ कराई जाएगी। कल्सन ने कहा कि जल्दी ही हांसी में भी 500 दलितों को बौद्ध धर्म ग्रहण कराया जाएगा।
इस मौके पर जिला भिवानी के रोहनात गांव के दलित समाज से संबंधित लोग भी काफी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। रोहनात गांव के लोगों की जमीन 1857 के गदर के बाद अंग्रेजों ने दूसरे गांवों के लोगों को नीलाम कर दी थी जिसे वापस पाने के लिए करीबन 150 दलित परिवार पिछले 50 साल से सरकार के साथ लड़ाई लड़ रहे हैं परंतु शहीदों के वंशज होने के बावजूद भी उन्हें आज तक अपनी जमीन वापस ना मिली है उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वह भी आने वाले समय में अपने गांव रोहनात में भी बौद्ध धर्म ग्रहण करने का काम करेंगे।
इस मौके पर दिनेश खापड़, दिलबाग मुजादपुर, हरज्ञान जनागल ,बुधराम सेलवाल ,महा
सिंह ,रामचंद्र , अंबेडकर युवा संघ चैन्नत के होशियार सिंह , भाटला गांव के भाटला दलित संघर्ष समिति के प्रधान बलवान सिंह ,अजय भाटला, जय भगवान भाटला, सुनील दहिया ,जोगीराम ,जमीला ,विकास,अमिताभ सहित सैकड़ों दलित ग्रामीण मौजूद थे।