हिसार,
हिसार संघर्ष समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र श्योराण ने सत्तापक्ष से जुड़े पार्षदों व सरकार की मंशा पर विकास के मामले में सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्षदों से लेकर प्रधानमंत्री तक भाजपा के हैं, लेकिन जनता फिर भी परेशान है, जिसका समाधान नहीं खोजा जा रहा है। उन्होंने कुछ पार्षदों द्वारा आंदोलन करने के ऐलान को भी जनता को गुमराह करने वाला बताया और साथ ही अधिकारियों को चेताया कि यदि उन्होंने मंजूर हो चुके विकास कार्य शुरू नहीं करवाए तो हिसार संघर्ष समिति शहरवासियों को साथ लेकर आंदोलन शुरू करेगी।
एक बयान में जितेन्द्र श्योराण ने कहा कि जब बरसात नहीं आ रही थी तो जनता बिजली कटौती से जूझ रही थी और अब जब बरसात आ गई है तो जलभराव तथा सड़कों व गलियों के टूटने की समस्या से जनता जूझ रही है। अधिकारी बाढ़ बचाव प्रबंधों के दावे कर रहे थे लेकिन उनके दावे मामूली बरसात ही नहीं झेल पाए तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्होंने बाढ़ बचाव के कितने प्रबंध किये हुए थे। दो दिन की बरसात के बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में पानी खड़ा है, यहां तक कि अधिकतर मुख्य मार्ग भी जलभराव की समस्या से ग्रसित है। मुख्य मार्गों पर संबंधित विभागों द्वारा आए दिन विकास कार्य करते दिखाने का प्रयास किया जाता है लेकिन ये सभी कार्य ड्रामें से ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दे रहे।
जितेन्द्र श्योराण ने शहर के कुछ पार्षदों के उन बयानों पर प्रतिक्रिया जताई, जिसमें उन्होंने आंदोलन करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पार्षद छोटी सरकार का हिस्सा होते हैं, यदि वे ही आंदोलन करेंगे तो फिर जनता किसके पास जाएगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन की बात कहकर पार्षद अपनी नाकामी छिपाने का प्रयास कर रहे हैं, वास्तव में उनकी नीति व नीयत में फर्क है। उन्होंने कहा कि सेक्टरों सहित अनेक क्षेत्रों के विकास कार्य निगम चुनाव से पहले ही मंजूर हो चुके हैं लेकिन उन्हें पहले तो निगम चुनाव की आचार संहिता के कारण और बाद में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण शुरू नहीं करवाया गया। अब बरसात शुरू हो चुकी है और थोड़े दिन बाद यदि विधानसभा चुनाव का डंका बज गया तो ये विकास कार्य फिर टाल दिये जाएंगे, जबकि वर्क आर्डर हो चुका है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य शुरू न होना निगम की लचर व्यवस्था का परिचायक है। संघर्ष समिति नेता ने अधिकारियों को चेताया कि यदि शीघ्र ही विकास शुरू नहीं करवाये तो हिसार संघर्ष समिति शहरवासियों के साथ आंदोलन को मजबूर होगी, जिसके जिम्मेवार संबंधित विभाग व अधिकारी होंगे।