हिसार

तेरापंथ महिला मंडल द्वारा युगल कार्यशला का आयोजन

जीवन की खुशहाली के लिए ‘मी’ का प्रयोग कम करके ‘वी’ का प्रयोग करें : मुनि विजय कुमार

हिसार,
तेरापंथ भवन कटला रामलीला हिसार अखिल भारतीय महिला मंडल द्वारा निर्दिष्ट युगल कार्यशाला के अंतर्गत ‘हैप्पी मी, हैप्पी वी, हैप्पी लाइफ’ का रोच कार्यक्रम शासन श्री मुनि विजय कुमार के सानिध्य में चला। इस अवसर पर युगल भाई-बहनों को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि भाषा के माध्यम से व्यक्ति अपने भावों को अभिव्यक्ति देता है। हर भाषा की अपनी स्वतंत्र अभिव्यक्ति होती है। अंगे्रजी भाषा में भी ‘मी’ शब्द व्यक्तिगत चेतना का सूचक है। व्यक्ति अपने ढंग से सोचता है, कार्य करता है किंतु एक और साथ में जुडऩे पर वह युगल बन जाता है, फिर वह ‘मी’ का प्रयोग न करके ‘वी’ का प्रयोग करता है। जीवन की खुशहाली के लिए यह जरूरी है कि व्यक्ति ‘मी’ का प्रयोग कम करके ‘वी’ का प्रयोग ज्यादा करे। ‘वी’ शब्द में दो व्यक्तियों की खुशहाली के साथ पूरे परिवार की खुशहाली जुड़ी हुई है, चाहे फिर वे कितने ही सदस्य क्यों न हों।
मुनि श्री ने कहा कि विकसित टैक्नोलॉजी के युग में घर की बाहरी साज सज्जा पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है और उसके आधार पर घर की खुशहाली का अंाकलन किया जाता है। लोग घरों को सजाने में लाखों रुपया खर्च कर देते हैं। प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति घर को ऐसा सजाते हैं जैसे नई दुल्हन को विवाह से पहले सजाया जाता है। लोग आते हैं, घर की साज-सज्जा को देखकर प्रशंसा भी करके जाते हैं, लेकिन यह बाहरी सजावट ही क्या घर के सदस्यों को खुशियों से भर सकती है जिस घर में रात-दिन कलह, अशांति, आक्रोश, दुर्भावना आदि बुराइयों का कचरा पड़ा रहता है, वह बाहर से सजा होने पर भी परिवार के सदस्यों को खुशहाली नहीं दे सकता। उन्होंने आचार्यश्री तुलसी के कोलकाता प्रावास का एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक बूढ़ी मां जो कि संपन्न परिवार से थी, गुरुवर के दर्शन करके रोने लगी। पूज्यवर से पूछने पर वह बोली – गुरु जी, मेरे पति जब तक जीवित थे तब तक मैंने खूब आनंद का जीवन जीया। उनके परभव जाते ही मेरी तो दुनिया उजड़ गई। बेटे-बहुएं सब हैं किंतु सब आपस में झगड़ते रहते हैं, कोई भी मेरी बात नहीं सुनता। सबके रहने के लिए अच्छे बंगले हैं किंतु उनमें रहने वाले कोई सुखी नहीं हैं। लोग अपने घरों में मंदिर भी बनाते हैं जहां बैठकर कुछ समय अपने इष्ट का स्मरण भी करते हैं किंतु उनकी पूजा फलीभूत नहीं होती। हर घर में प्रेम, करुणा, मैत्री, समता, सहिष्णुता, सामंजस्य, विनय, वात्सलय आदि दिव्य गुणों को देवी-देवता की तरह प्रतिष्ठा मिले तो वह घर स्वर्ग की उपमा से उपमित हो सकता है और वहां की हुई उपासना भी फलवती बन सकती है। बाहर की साज-सज्जा कम होने पर भी वह घर सबके आकर्षण का केंद्र बन जाता है। हर व्यक्ति आनंद के शिखर पक पहुंचने के लिए केवल अपनी ही नहीं, इससे आगे अपने परिवार की खुशहाली के लिए प्रयत्नशील रहे। ज्ञान चेतना वर्ष के अंतर्गत अखिल भारतीय महिला मंडल का यह अभियान सफल हो।
मुनिश्री के नमस्कार महामंत्र के समुच्चारण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तेरापंथ महिला मंडल की बहिनों ने मंगलाचरण ‘हम नया सवेरा लाए’ की प्रस्तुति दी। म.म. की अध्यक्षा रवि जैन ने स्वागत भाषण दिया। तदनंतर मुनिश्री का प्रवचन व विषय से संबंधित गीत हुआ। श्रोताओं से प्रश्न पूछे गए। उत्तर दाताओं को महिला मंडल द्वारा पुरस्कार वितरित किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन उपासक राजकुमार जैन ने किया। तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष मनीष जैन ने अ.भा.ते.यु.प. द्वारा आयोजित संबोधी परीक्षा के प्रमाण पत्र वितरित किए। म. मंडल की मंत्री योगिता जैन ने सभी का आभार ज्ञापन किया। युगल कार्यशाला का कुशल संयोजन सुनीता जैन ने किया।

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