हिसार

कर्ज के दलदल में शिक्षा के पुजारी, सरकार ने फेरी आंखें

आदमपुर(अग्रवाल)
कोरोना महामारी के कारण कोचिंग, कम्पयूटर सैंटर व लाइब्रेरी संचालक कर्ज के दलदल में दबते जा रहे हैं। बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी प्रशासन या सरकार ने इनकी तकलीफों की ओर ध्यान नहीं दिया है। इसके चलते इन संचालकों में काफी मायूसी देखने को मिल रही है। इन लोगों का दर्द है कि मार्च से उनके सैंटर बंद पड़े है लेकिन खर्चा ज्यों का त्यों है। आमदनी फूटी कौड़ी की नहीं हो पाई है खर्च पहले की तरह ही रहने से लगातार कर्ज बढ़ता जा रहा है। हालत तो ये हो गई है अब इन संचालकों को उधार में राशन लेने में भी काफी कठिनाई आने लगी है। लगातर 5 माह से करियाना, दूध, सब्जी जैसे रोजमर्रा के जरुरत के समान के पैसे भी चुकाने मुश्किल होते जा रहे हैं।

किराया और बिजली के बिल ने मारा
शिक्षा सेवा देने वाले इन सैंटरों के संचालक अमित अग्रवाल, मुकेश गोयल, हरिनिवास, नरेश, विकास आदि ने बताया कि मार्च से उनके सैंटर बंद पड़े हैं। लेकिन उनका किराया पहले की भांति ही लगातार लग रहा है। इन संचालकों का कहना है कि वे वार्षिक या 6 महिने का किराया एडवांस के रुप में देते हैं। ऐसे में दुकान मालिक उनसे पूरा किराया ले गए। करीब 5 माह बाद भी उनके सैंटरों पर ताला लगा है ऐसे में उनका आधे साल का किराया तो बिना आमदनी के ही चला गया। इसी प्रकार हर माह बिजली का बिल आ रहा है। सैंटर बंद होने के बाद भी उनको बिल भरना पड़ रहा है। सरकार से कई बार वे राहत की मांग कर चुके हैं, लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

कर्ज पर लग रहा ब्याज
कुछ सैंटर संचालकों का कहना है कि उनकी आमदनी हैंड टू माउथ ही रहती है। ऐसे में हर बार प्रतिष्ठान का किराया ब्याज पर उठाकर देते हैं। बाद में विद्यार्थियों की फीस आने पर धीरे-धीरे कर्ज चुका देते हैं। इस बार उन्होंने कर्ज लेकर किराया तो दे दिया लेकिन सरकार द्वारा सैंटर बंद रखे जाने के कारण कर्ज चुका नहीं पा रहे हैं। ऐसे में अब तक उनको 5 माह का ब्याज भी लग चुका है। अगर अगले माह तक सैंटर नहीं खुले तो ब्याज चुकाने की चिंता और परेशान करेगी।

आमजन की सरकार-हम कहां जाए
इन सैंटर संचालकों का कहना है कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने हर तबके का ध्यान रखा है। इसके चलते इसे आमजन की सरकार भी कहा जाता है। लेकिन उनकी तरफ सरकार का ध्यान क्यों नहीं जा रहा है। वे कई बार तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन भी दे चुके हैं लेकिन उनकी तरफ सरकार की आंखें क्यों बंद है। ज्यादा नहीं तो सरकार उनको 1 साल का किराया और बिजली बिल में राहत दे दे तो उनकी चिंता समाप्त हो जाए।

बस में 52 सवारी तो सैंटर क्यों है बंद
संचालकों का कहना है कि सरकार ने रोडवेज बसों में 52 सीट पर 52 सवारी ही बैठाने की इजाजत दे रखी है तो शिक्षा देने वाले ये सैंटर बंद क्यों कर रखे हैं। इनका कहना है कि सरकार ज्यादा नहीं तो एक समय में केवल 10 से 15 बच्चों को बुलाने की इजाजत तो दे ही सकती है। यदि इतनी इजाजत के साथ सैंटर को खोलने की छूट दे दी जाती है तो ज्यादा नहीं तो वे बिजली का बिल, कर्ज का ब्याज और खाने का बिल तो चुका ही पाएंगे।

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Jeewan Aadhar Editor Desk