हिसार

कम लागत मेें अधिक मुनाफा देता मशरूम : डॉ. ए.के. छाबड़ा

एचएयू में राष्ट्रीय खुंब दिवस आयोजित

हिसार,
बागवानी में विविधीकरण के रूप मेंं मशरूम एक ऐसा व्यवसाय है जो कम पैसे से शुरू किया जा सकता है और सफल होने पर मशरूम उत्पादन को किसी भी स्तर पर बढ़ाया जा सकता हैं।
यह बात हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. ए.के. छाबड़ा ने विश्वविद्यालय के पौध रोग विभाग द्वारा राष्ट्रीय खुंब दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इस वर्ष खुंब को रोग प्रतिरोधकता बुस्टर का विषय दिया गया। इस खुंब दिवस में 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि ने बताया कि खुम्ब पोषण व औषधीय गुणों से भरपूर है। खुंब में कैलोरी और वसा की मात्रा कम होने की वजह से यह न सिर्फ वजन को बढऩे से रोकने और वजन घटाने में सहायक है बल्कि इसमें प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन बी, विटामिन डी, कॉपर, पोटाशियम, फास्फोरस, सेलेनियम, फाइओकेमिकल्स और एंटी आक्सीडेन्टस जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते है जो व्यक्ति को विभिन्न तरह के रोगों से दूर रखने में मदद करते हैं। खुंब एक संतुलित आहार है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 30-40 प्रतिशत तक पाई जाती है इसलिये शाकाहारी लोगों के लिये प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत है। खुंब में विटामिन डी, कैल्शियम, पोटाशियम और फास्फोरस हड्डियों को कमजोर होने से रोक कर उन्हें मजबूत बनाते हैं। दिल के रोगियों के लिये भी खुंब का सेवन लाभकारी है। खुंब में मौजूद लीन प्लांट प्रोटीन में न सिर्फ कैलोरी की मात्रा कम होती है बल्कि फैट भी न के बराबर होता है। उन्होंने बताया कि खुंब में पाये जाने वाले फाइटोकेमिकल्स इसे एंटी बैक्टिरियल और एंटी फंगल बनाते है जो व्यक्ति को मौसमी संक्रमण को बचाने और रोग प्रतिरोधकता को मजबूत बनाने में मदद करते है। खुंब के सेवन से इसमें मौजूद फॉलिक एसिड और आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।
खुंब उत्पादन में प्रदेश अग्रणी : डॉ. अजीत राठी
पौध रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजीत सिंह राठी ने बताया कि खुंब उत्पादन करके युवक/युवतियां स्वरोजगार प्राप्त कर सकते हैं। हरियाणा राज्य 20 हजार मीट्रिक टन खुंब उत्पादन करके अग्रणी स्थान पर है। सफेद बटन खुंब के अलावा ढ़ीगरी खुंब, शिटाके खुंब, लायब्समैने खुंब, कॉर्डिसैप खुंब इत्यादि औषधीय खुंबों का भी उत्पादन करें। डॉ. कुशल राज ने बताया कि खुंब के मूल्य सवंर्धित उत्पाद जैसे अचार, बिस्कुट, पापड़, बढिय़ा इत्यादि तैयार करके भी बाजार में बेचे जा सकते हंै, जिसकी बाजार में बहुत मांग है। खुंब दिवस के संयोजक डॉ. सतीश कुमार ने कम लागत से खुंब उत्पादन की कई तकनीकों को लेकर चर्चा की। उन्होंने पराली को न जलाकर इसका उपयोग मशरूम के लिए कम्पोस्ट बनाने में किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे वातावरण दूषित नहीं होगा और मिट्टी में सूक्ष्म जीवी नष्ट नहीं होंगे। डॉ. राकेश चुघ ने औषधीय खुम्बों जैसे कार्डिसैप, शिटाके, लायनस मैने इत्यादि खुंबों को उगाने की विधि पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. विनोद मलिक ने बताया कि भूमिहीन व्यक्ति भी खुंब का उत्पादन कर सकता है और मुनाफा कमा सकता है।

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