हिसार

कोरोना से बचाव के लिए शारीरिक दूरी बढ़ाएं, सामाजिक दूरी घटाएं : कुलपति

एचएयू में ‘कोविड के समय मनुष्य की मनोस्थिति’ विषय पर काऊंसलिंग सत्र आयोजित

हिसार,
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बचने के लिए हमें सावधानी रखते हुए सामाजिक दूरी की बजाय शारीरिक दूरी को बढ़ाना होगा। सामाजिक दूरी कम कर हम अपने परिजनों व निकटतम के साथ विचार-विमर्श कर मन को सुकुन दे सकते हैं तथा शारीरिक दूरी को बढ़ाकर कोरोना से बचाव किया जा सकता है।
यह बात हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीआर कांबोज ने विश्वविद्यालय में छात्र कल्याण निदेशालय की छात्र काऊंसलिंग एवं प्लेसटमेंट सेल की ओर से आयोजित ऑनलाइन काउंसलिंग सत्र को संबोधित करते हुए कही। सत्र का मुख्य विषय ‘कोविड के समय मनुष्य की मनोस्थिति’ रखा गया। मुख्य अतिथि ने कहा कि इस महामारी के समय में मनुष्यों में तनाव, उदासी, बोरियत, निराशा एवं चिड़चिड़ापन उत्पन्न हो रहा है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसे दूसरों के साथ बातचीत करने के लिए बुनियादी आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने में असमर्थ होने पर कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। लंबे समय तक अकेला रहना मानसिक एवं शारीरिक स्थिति के लिए हानिकारक है। इसलिए हमें केंद्र व राज्य सरकार की सभी हिदायतों का पालन करते हुए स्वयं, निकट सगे-संबंधियों और अपने परिवार को सुरक्षित रखना है। अफवाहों पर बिलकुल ध्यान न दें। साथ ही संक्रमित व्यक्ति से उसका हालचाल जानते हुए लगातार फोन के माध्यम से संपर्क बनाए रखें और उनका हांैसला बढ़ाते रहें।
कुलपति ने डॉ. सुधीर चांदना की सराहना करते हुए कहा कि यह बहुत ही गर्व और हर्ष की बात है कि वे इसी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं जिन्होंने इस समय कोरोना की दवाई को विकसित किया है। उन्होंने कहा कि एचएयू में लगातार वैक्सीनेशन का कार्य जारी है और इसके प्रति लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जा रहा है। सत्र के शुभारंभ अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रीति मलिक ने सभी का स्वागत किया जबकि समापन अवसर पर छात्र कल्याण निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह दहिया ने प्रतिभागियों, मुख्यातिथि व मुख्य वक्ता का धन्यवाद किया। सत्र का संचालन सहायक छात्र कल्याण निदेशक डॉ. आरएस बेनीवाल ने किया।
केवल एक प्रतिशत रोगी ही होते हैं गंभीर : डॉ. नरेंद्र गुप्ता
कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. नरेंद्र गुप्ता ने मुख्य वक्ता के तौर पर कहा कि केवल एक प्रतिशत लोग ही कोरोना के गंभीर रोगी होते हैं। ज्यादातर लोग घबराहट और मानसिक रूप से मजबूत न होने के कारण अधिक शिकार होते हैं। मानसिक रूप से कमजोर और घबराहट से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसलिए मनुष्य को खानपान का विशेष ध्यान, योग, मेडिटेशन, परिजनों से वीडियो-ऑडियो कॉल करते हुए संपर्क रखना चाहिए और नकारात्मक खबरें नहीं देखनी चाहिए। हालांकि सकारात्मक समाचार जैसे ऑक्सीजन की उपलब्धता, नई दवाई की खोज, बेड की उपलब्धता, किसी व्यक्ति द्वारा किए गए सकारात्मक प्रयास आदि की जानकारी जरूरी है जिससे उसका हौसला बना रहे। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में हर समय डॉक्टर मरीजों की सेवा के लिए उपलब्ध रहते हैं। हर खांसी-जुकाम कोरोना नहीं होता, इसलिए डॉक्टरों से परामर्श करते रहें और घबराएं नहीं। सत्र के दौरान प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम भी रखा गया था, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी कोरोना को लेकर शंकाओं को दूर किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशक एवं विभागध्यक्ष, कर्मचारी व विद्यार्थी जुड़े हुए थे।

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