धरनास्थल पर आंगनवाड़ी महिलाओं ने हवन करके की सरकार की सद्बुद्धि की प्रार्थना
हिसार,
आंगनवाड़ी केन्द्रों को निजी एनजीओ के अधीन करने के विरोध में व वर्ष 2018 में किया गया फैसला लागू करवाने की मांग पर आंदोलनरत आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन ने धरने के दौरान गुरू पूर्णिमा के उपलक्ष्य में सरकार की सद्बुद्धि के लिए धरनास्थल पर हवन किया। धरने के दौरान मंत्रों के माध्यम से सरकार की सद्बुद्धि की प्रार्थना की गई।
यूनियन का धरना व क्रमिक अनशन आज 50वें दिन भी जारी रहा। धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान बिमला राठी व सरोजनी गंगवा ने किया जबकि कविता राजली व सरोज डोभी ने संचालन किया। धरने के साथ ही पांच महिलाएं कमलेश राजली, सरोजनी हिसार, वीना खारिया, गीता डाबड़ा व सुदेश हिसार अर्बन अनशन पर बैठी। धरने पर जिला प्रधान बिमला राठी ने कहा कि आज गुरू पूर्णिमा का शुभ दिन है और इसी उपलक्ष्य में आंगनवाड़ी महिलाओं ने हठधर्मी पर उतरी सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन करके प्रार्थना की है। उन्होंने कहा कि पहली बार कोई हठधर्मी सरकार देखी है, जो आंगनवाड़ी महिलाओं के इतने लंबे आंदोलन के बाद भी अपनी आंख व कान बंद किये बैठी है। उन्होंने कृषि कानून वापिस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा को किसान आंदोलन व उनकी एकता की जीत बताया और कहा कि सैंकड़ों किसानों की शहादत के बाद सरकार ने ये फैसला लिया है।
बिमला राठी ने कहा कि आंगनवाड़ी महिलाएं विभाग व बच्चों के हित के लिए आंदोलन चलाए हुए हैं और वे तब तक पीछे नहीं हटेंगी जब तक उनकी मांग नहीं मान ली जाती। उन्होंने कहा कि निजी एनजीओ के अधीन सेंटर कर दिये जाने से बच्चों की शुरूआती पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केन्द्र संचालकों पर दबाव बनाकर सेंटर खुलवाने का प्रयास करने वाले अधिकारियों को चेताया कि वे अपनी हद से बाहर न जाएं। जितने प्रयास वे आंगनवाड़ी संचालकों को दबाने में लगा रहे हैं, उससे आधे प्रयास भी सरकार के समक्ष हमारी मांगे व समस्याएं पहुंचाने का करें तो समस्या का समाधान हो सकता है लेकिन अधिकारी समस्या के समाधान की बजाय समस्या को बढ़ाना चाहते हैं। इस अवसर पर जिलेभर से आई सैंकड़ों महिलाओं ने सरकार विरोधी नारेबाजी की और सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन में आहुति डाली।