धर्म

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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—476

एक युवक अपनी विधवा मां को अकेली छोडकर भाग निकला और एक मठ में जाकर तंत्र-साधना करने लगा। कई वर्ष बीत गए। एक दिन उस...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—475

एक पंडित जी यजमानी कर दूसरे गांव से अपने घर लौट रहे थे। वे बहुत प्रसन्‍न थे, क्‍योंकि दक्षिणा में उन्हें एक बकरी मिली थी।...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—474

नारद जी कलियुग का क्रम देखते हुए एक बार वृन्दावन पहुंचे। उन्होंने एक स्थान पर देखा कि एक युवती के पास दो पुरुष मूच्छित पड़े...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—473

मोहन और श्याम दो मित्र थे। दोनों बिना सोचे-विचारे किसी भी व्यक्ति अथवा परिस्थिति के विषय में अनुमान लगा लिया करते थे। उनके अनुमान अधिकतर...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—472

दीर्घकाल तक राज करने के बाद महाराज ययाति ने अपने पुत्र को सिंहासन सौंप दिया और स्वयं बन में जाकर तप क़रने लगे। कठोर तप...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—471

एक दानवीर राजा था। राजा की दानशीलता की ख्याति सुनकर एक संत उसके राज्य में आए। वे राजा से मिलने राजमहल पहुंचे और वहां दान...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—470

केशिनी नाम की एक अत्यंत सुंदर कन्या को लेकर दैत्यराज प्रहलाद के पुत्र विरोचन और महर्षि अंगिरा के पुत्र सुधन्वा में परस्पर विवाद छिड़ गया।...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—469

बनारस में एक पंडित जी का विशाल आश्रम था, जहां वे अपने शिष्यों को शिक्षा देते थे। उनके आश्रम के सामने एक बढ़ई बैठता था।...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—468

गुरुनानक देव जी ने अपने पंथ के उत्तराधिकारी के रूप में अपने परिवार के सदस्यों में से किसी का चयन नहीं किया था। उनके मन...
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परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—467

राबिया महान्‌ भक्त थी। उनकी अटूट भक्ति से सभी लोग द थे और लोक समाज में वे श्रद्धा का केंद्र थी। उनके सत्संग में आम...